आईडीएफसी बैंक घोटाला मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई/आईएएस अधिकारी के घर छापा / 200 करोड़ की संपत्तियां अटैच*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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आईडीएफसी बैंक घोटाला मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई/आईएएस अधिकारी के घर छापा / 200 करोड़ की संपत्तियां अटैच*
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चंडीगढ़ ;-बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक सरकारी फंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में शिकायत दाखिल की है। जांच एजेंसी ने मामले में 200.84 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियां भी अटैच की हैं। ईडी के अनुसार जांच में करीब 645 करोड़ रुपये के सरकारी धन को फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर कर मनी लॉन्ड्रिंग किए जाने के आरोप सामने आए हैं।ईडी के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय की ओर से दाखिल शिकायत में रिभव ऋषि, विक्रम वाधवा, अभय कुमार, नरेश कुमार, कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, स्वाति सिंगला, अभिषेक सिंगला, दिव्या अरोड़ा, मनोज कुमार शर्मा, मैसर्स मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और अंकुर शर्मा सहित अन्य संस्थाओं के नाम शामिल हैं। ईडी के मुताबिक मामले की जांच के दौरान रिभव ऋषि, अभय कुमार, विक्रम वाधवा और नरेश कुमार उर्फ नरेश भुवानी को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूछताछ में आरोपियों ने कथित फर्जीवाड़े के तौर-तरीकों, धन के प्रवाह, सार्वजनिक सेवकों की संभावित भूमिका और बिचौलियों के माध्यम से किए गए भुगतान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। इन पहलुओं की जांच अभी जारी है।
*645 करोड़ रुपये के सरकारी धन की हेराफेरी का आरोप*
जांच एजेंसी के अनुसार विभिन्न सरकारी विभागों और निजी स्कूलों के बैंक खातों से करीब 645 करोड़ रुपये का सरकारी धन कथित रूप से फर्जी तरीके से निकालकर शेल कंपनियों के माध्यम से विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया। बाद में इस राशि को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए रियल एस्टेट, व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया। मामले में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी।
*रियल एस्टेट, बैंक खातों और एफडी भी अटैच*
ईडी ने 200.84 करोड़ रुपये मूल्य की जिन संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है, उनमें आवासीय और व्यावसायिक भवन, औद्योगिक इकाइयां, कृषि भूमि, बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट और विभिन्न रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार इनमें से 151.33 करोड़ रुपये की संपत्तियां विक्रम वाधवा और उससे जुड़ी संस्थाओं से संबंधित हैं।
*फर्जी एफडीआर और बैंक रिकॉर्ड तैयार करने का आरोप*
ईडी का आरोप है कि बैंक अधिकारियों, रियल एस्टेट कारोबारियों, ज्वेलर्स, शेल कंपनियों के संचालकों, बिचौलियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से फर्जी एफडीआर, आरटीजीएस/एनईएफटी अनुरोध पत्र, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन को अवैध रूप से स्थानांतरित किया गया। इसके बाद रकम को कई खातों में घुमाकर विभिन्न कारोबारों और संपत्तियों में निवेश किया गया। जांच एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और धन शोधन नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
*आईएएस अधिकारी के आवास पर छापेमारी *
आईडीएफसी बैंक घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को सेक्टर-6 स्थित एक आईएएस अधिकारी के आवास पर छापेमारी की। ईडी की टीम सुबह ही अधिकारी के घर पहुंच गई थी और रात करीब आठ बजे तक दस्तावेजों व अन्य रिकॉर्ड की जांच करती रही। कार्रवाई की सूचना मिलते ही प्रशासनिक हलकों में चर्चा का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार ईडी की टीम दो टैक्सी नंबर की गाड़ियों में अधिकारी के आवास पर पहुंची। टीम ने कई घंटे तक घर के भीतर वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री की गहन जांच की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई बहुचर्चित आईडीएफसी बैंक घोटाले की जांच से जुड़ी है। जांच एजेंसी मामले से संबंधित वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजी कड़ियों की पड़ताल कर रही है। हालांकि देर शाम तक ईडी की ओर से कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। देर शाम तक ईडी की टीम आवास पर मौजूद रही और जांच प्रक्रिया जारी थी। मामले को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर भी चलता रहा।

