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भरत मिलाप का भावुक मंचन पर MLA कुलवंत सिंह ने कहा / रामलीला दीर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, जीवन जीने की सीख देती है*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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भरत मिलाप का भावुक मंचन पर MLA कुलवंत सिंह ने कहा / रामलीला दीर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, जीवन जीने की सीख देती है*
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मोहाली ;- भाई के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश करने वाले भरत मिलाप के प्रसंग ने रामलीला एवं दशहरा ग्राउंड, फेज-1, मोहाली में दर्शकों को भावुक कर दिया। श्री रामलीला एवं दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला की छठी रात्रि में भरत मिलाप का मंचन किया गया। इस अवसर पर मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर विधायक कुलवंत सिंह ने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख देने वाला मंच है। भगवान श्रीराम की लीलाओं से हमें सीख मिलती है कि माता-पिता की सेवा कैसे करनी चाहिए, भाई-भाई के बीच प्रेम और त्याग का भाव कैसा होना चाहिए तथा पत्नी के सम्मान और मर्यादा की रक्षा किस प्रकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना बेहद जरूरी है। अभिभावकों को अपने बच्चों को रामलीला दिखानी चाहिए, ताकि वे भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर पारिवारिक मूल्यों, कर्तव्य और रिश्तों की अहमियत को समझ सकें। उन्होंने अपील की कि लोग रामलीला को केवल मनोरंजन के रूप में न देखें, बल्कि यहां से कोई न कोई सीख लेकर अपने जीवन में अपनाएं।
भरत मिलाप के मंचन में भगवान श्रीराम के प्रति भरत के प्रेम, उनके त्याग और भाईचारे की भावना को दर्शाया गया। वनवास के दौरान श्रीराम से मिलने पहुंचे भरत का प्रसंग भारतीय संस्कृति में पारिवारिक प्रेम और निस्वार्थ समर्पण की मिसाल माना जाता है।
मंचन में भगवान श्रीराम की भूमिका प्रतीक, लक्ष्मण की भूमिका संदीप राणा, माता सीता की भूमिका शिवानी, भरत की भूमिका कमल और शत्रुघ्न की भूमिका यशमीत ने निभाई। वहीं कौशल्या की भूमिका रितु, कैकेयी की भूमिका मधु, सुमित्रा की भूमिका मोनिका और मंथरा की भूमिका साध्वी ने निभाई। अन्य कलाकारों ने भी विभिन्न पात्रों के माध्यम से प्रसंग को जीवंत बनाया।

श्री रामलीला एवं दशहरा कमेटी के अध्यक्ष आशु सूद के नेतृत्व में आयोजित यह रामलीला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का प्रयास है। रामलीला का मंचन 19 अक्टूबर तक जारी रहेगा, जबकि 20 अक्टूबर को विजयदशमी उत्सव मनाया जाएगा। विजयादशमी के तुरंत बाद राजतिलक भी किया जाएगा।

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