*नायब सरकार औऱ सफाई कर्मचारियों के संकटमोचक साबित हुए कृष्ण बेदी / 36 दिन के गतिरोध को संवाद से तोड़ा / कर्मचारियों और सरकार के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बने बेदी*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*नायब सरकार औऱ सफाई कर्मचारियों के संकटमोचक साबित हुए कृष्ण बेदी / 36 दिन के गतिरोध को संवाद से तोड़ा / कर्मचारियों और सरकार के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बने बेदी*
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चंडीगढ़ ;- हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की 36 दिन लंबी हड़ताल का समाधान केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि संवाद, संवेदनशीलता और राजनीतिक सूझबूझ की जीत के रूप में सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी की भूमिका विशेष रूप से चर्चा में रही।
लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के बीच बेदी ने कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ संवाद बनाए रखा और बातचीत के रास्ते को बंद नहीं होने दिया। अंतिम दौर की वार्ता में उनकी सक्रिय भूमिका से सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति का रास्ता तैयार हुआ।
*मंत्री बेदी ने दिखाई संवेदनशील नेतृत्व क्षमता*
सफाई कर्मचारी प्रदेश की शहरी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे समय में जब हड़ताल लंबी होती जा रही थी और आम जनता भी परेशान थी, कृष्ण बेदी ने टकराव के बजाय बातचीत और समाधान को प्राथमिकता दी। उनकी सबसे बड़ी ताकत यही रही कि उन्होंने कर्मचारी पक्ष की बात सुनी और सरकार की नीतिगत सीमाओं के बीच व्यावहारिक समाधान निकालने की कोशिश की। यही कारण है कि अंतिम बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकी।
*बेदी का कर्मचारियों को बड़ी राहत दिलाने में योगदान*
समझौते के बाद कर्मचारियों के लिए जोखिम भत्ता, वर्दी भत्ता, मेडिकल सुविधाएं, बीमा, छुट्टी, वेतन संबंधी लाभ और अन्य मांगों पर सहमति बनी। निलंबित तथा सेवा से हटाए गए कर्मचारियों की वापसी और हड़ताल अवधि को अतिरिक्त कार्य के माध्यम से समायोजित करने पर भी सहमति बनी।
रिक्त पदों पर सफाई कर्मचारियों और सीवरमैन की भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने तथा भर्ती मापदंड तय करने वाली समिति में कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि को शामिल करने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है।
*कृष्ण बेदी की कार्यशैली सरकार औऱ हड़तालियों के लिए बनी मिसाल*
राजनीतिक गलियारों में अक्सर कर्मचारी आंदोलनों का समाधान कठिन माना जाता है, लेकिन कृष्ण बेदी ने इस मामले में संवाद को हथियार और विश्वास को आधार बनाया। उन्होंने यह संदेश दिया कि सरकार और कर्मचारियों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बातचीत के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए। कृष्ण बेदी की भूमिका को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने केवल मांगों और आंकड़ों की बातचीत नहीं की, बल्कि सफाई कर्मचारियों की सामाजिक स्थिति और उनके योगदान को समझते हुए समाधान की दिशा में प्रयास किया।
*संकट में समाधान निकालने वाले मंत्री की मजबूत नेता की बनी छवि*
36 दिन के लंबे आंदोलन के बाद हड़ताल समाप्त होना सरकार के लिए बड़ी राहत है। शहरों में सफाई व्यवस्था फिर से सामान्य करने का रास्ता खुला है और हजारों कर्मचारियों को भी राहत मिली है। इस पूरे घटनाक्रम ने कृष्ण बेदी की ऐसी नेता की छवि को मजबूत किया है जो कठिन परिस्थितियों में बातचीत से रास्ता निकालने, कर्मचारी वर्ग को साथ लेकर चलने और सरकार तथा जनता के बीच भरोसे का सेतु बनने में विश्वास रखते हैं।
बड़ा संदेश
*“कृष्ण बेदी ने किया साबित / कठिन मुद्दे टकराव से नहीं, संवाद और संवेदनशील नेतृत्व से सुलझते हैं।”*
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का समाधान निश्चित रूप से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार की सामूहिक उपलब्धि है, लेकिन वार्ता को आगे बढ़ाने और कर्मचारी पक्ष से संवाद कायम रखने में कृष्ण बेदी की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
