*हरियाणा सफाई कर्मचारियों की हड़ताल / भाजपा के SC मंत्री-नेताओं की भूमिका औऱ प्रभाव पर उठे सवाल!*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*हरियाणा सफाई कर्मचारियों की हड़ताल / भाजपा के SC मंत्री-नेताओं की भूमिका औऱ प्रभाव पर उठे सवाल!*
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चंडीगढ़ ;- हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल अब केवल कर्मचारियों और सरकार के बीच मांगों का विवाद नहीं रह गई है, बल्कि इसने सत्तारूढ़ भाजपा के SC वर्ग से आने वाले मंत्रियों और नेताओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब एक महीने से जारी आंदोलन के बावजूद सरकार और कर्मचारियों के बीच गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार की ओर से विधानसभा में कह चुके हैं कि सफाई कर्मचारियों की 12 मांगें मानी जा चुकी हैं और न्यायालय से जुड़े मामलों में अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन दूसरी तरफ कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं और जब तक मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। हांसी में 4 सितंबर को आंदोलन के 30वें दिन कर्मचारियों ने सरकार के विरोध में मुंडन तक कराया।
*SC मंत्रियों औऱ नेतृत्व की अग्निपरीक्षा*
यही स्थिति भाजपा के SC वर्ग से जुड़े मंत्रियों और नेताओं के लिए राजनीतिक अग्निपरीक्षा बन गई है। सवाल यह है कि जिन नेताओं का अपने सामाजिक वर्ग में प्रभाव माना जाता है, वे सफाई कर्मचारियों और सरकार के बीच भरोसे की खाई को पाटने में अभी तक निर्णायक भूमिका क्यों नहीं निभा पाए?
क्या इन नेताओं को कर्मचारियों के बीच जाकर उनकी वास्तविक समस्याएं सुनकर मुख्यमंत्री और सरकार तक प्रभावी ढंग से बात पहुंचानी चाहिए थी? क्या सरकार के फैसलों को कर्मचारियों तक समझाने में कहीं संवाद की कमी रह गई?
इन सवालों का जवाब अब राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
सरकार सख्त, कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं
सरकार ने अब सख्त रुख अपनाते हुए हड़ताल पर चल रहे कर्मचारियों को 5 सितंबर तक ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया है और अनुपालन न करने पर कानूनी तथा विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी है। सरकार ने सफाई व्यवस्था को आवश्यक सेवा बताया है। वहीं कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार बातचीत और लिखित आदेश के माध्यम से समाधान निकाले। गुरुग्राम में भी आंदोलन के 29वें दिन कर्मचारी संगठनों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से बातचीत के जरिए समाधान की मांग की।
*सबसे बड़ा सवाल क्या नायब सरकार नही हो रहा राजनीतिक नुकसान*
सफाई कर्मचारियों का आंदोलन लंबा खिंचने से शहरों की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है और कई जगह कूड़े के ढेर तथा स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं सामने आ रही हैं। ऐसे में भाजपा के SC नेताओं के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ सरकार की नीति का बचाव और दूसरी तरफ अपने सामाजिक वर्ग के कर्मचारियों का विश्वास बनाए रखना।
अब राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगा है कि यदि भाजपा के SC मंत्री और वरिष्ठ नेता भी इस आंदोलन का स्थायी समाधान नहीं करा पाए तो क्या यह उनकी राजनीतिक पकड़ और सरकार में प्रभाव पर सवाल नहीं खड़ा करेगा?
फिलहाल गेंद सरकार और कर्मचारी संगठनों दोनों के पाले में है, लेकिन जितना लंबा गतिरोध चलेगा, उतना ही यह सवाल बड़ा होता जाएगा कि **आखिर सरकार के भीतर बैठे SC चेहरे इस संकट को खत्म कराने में निर्णायक मध्यस्थ की भूमिका कब निभाएंगे?**

