*चंडीगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार राणा ओबराय बेबाक औऱ निर्भीक पत्रकारिता की बने मिसाल / उत्तर भारत मे जनसरोकारों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले पत्रकार के रूप में बनाई अलग पहचान*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*चंडीगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार राणा ओबराय बेबाक औऱ निर्भीक पत्रकारिता की बने मिसाल / उत्तर भारत मे जनसरोकारों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले पत्रकार के रूप में बनाई अलग पहचान*
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चंडीगढ़ (राजेश) ;- पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी बेबाक लेखनी और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले राणा ओबराय ने अपनी अलग पहचान बनाई है। राजनीतिक और
प्रशासनिक मामलों पर उनकी पैनी नजर तथा जमीनी मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखने की शैली उन्हें अन्य पत्रकारों से अलग
पहचान देती है। राणा ओबराय लंबे समय से हरियाणा और
चंडीगढ़ की राजनीति, प्रशासन तथा सार्वजनिक हित से जुड़े विषयों पर सक्रिय रहे हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, वे मुद्दों को
अपने नजरिए से परखने और सवाल उठाने के लिए जाने जाते हैं।
उनकी पत्रकारिता में राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ आम जनता की समस्याओं को भी प्रमुख स्थान मिलता है।
*सत्ता के गलियारों से लेकर जनसमस्याओं तक पैनी नजर*
हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े
महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर राणा ओबराय लगातार नजर रखते हैं।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली, सरकार की नीतियों और राजनीतिक दलों की गतिविधियों से जुड़े विषयों को समाचारों के
माध्यम से सामने रखना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता
रही है। उनकी लेखनी का जोर केवल खबर देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई बार किसी मुद्दे के पीछे की राजनीतिक और
प्रशासनिक तस्वीर को भी सामने लाने का प्रयास किया जाता है।
*बेबाक सवाल पूछना बनी पहचान*
राणा ओबराय की पहचान एक ऐसे पत्रकार के रूप में भी बनी है जो महत्वपूर्ण मुद्दों पर सीधे सवाल उठाने से पीछे नहीं हटते।
उनका मानना है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता तक सही और तथ्यपरक जानकारी पहुंचाना तथा व्यवस्था से जवाब मांगना है। राजनीतिक हलकों में सक्रियता और प्रशासनिक मामलों की
समझ के चलते राणा ओबराय की खबरों और राजनीतिक
विश्लेषणों पर भी नजर रहती है। राणा ओबराय की पत्रकारिता
का मूल मंत्र साफ है—खबर वही, जो जनता के सवाल को आवाज दे और व्यवस्था को जवाब देने के लिए मजबूर करे।

