हरियाणा के पूर्व मुख्य सचिव विजय वर्धन दमदार आवाज के मालिक / प्रशासन से कला की दुनिया तक बनाई अलग पहचान*
*हरियाणा के मुख्य सचिव विजय वर्धन एवं सम्पादक राणा ओबराय की खास बातचीत*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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हरियाणा के पूर्व मुख्य सचिव विजय वर्धन दमदार आवाज के मालिक / प्रशासन से कला की दुनिया तक बनाई अलग पहचान*
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चंडीगढ़ ;- नवाबी शहर लखनऊ से सम्बंध रखने वाले हरियाणा के पूर्व मुख्य सचिव विजय वर्धन प्रशासनिक क्षेत्र में अपनी लंबी और प्रभावशाली पारी के बाद अब कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। विजयी वर्धन ने सम्पादक राणा ओबराय से फोन पर हुई खास बातचीत में बताया कि मैं एक वॉइस आर्टिस्ट हूँ। उन्होंने बताया मैने इंग्लिश, हिंदी तथा उर्दू भाषा में सोशल मुद्दे पर बनी लगभग 80 डॉक्युमेंट्री फ़िल्म में मैने अपनी आवाज दी है।वर्धन ने बताया कि हमने सजदा नाम से एक बैंड बनाया हुआ है। जो रोमांटिक, रूहानी और ऐतिहासिक विषय पर हम अपना 2 घण्टे का प्रोग्राम देते है। विजयी वर्धन ने बताया मेरी शिक्षा लखनऊ, इलाहाबाद के सरकारी स्कूलों में हुई हैं, जिसमे बच्चों को को महान कवियों की कविताओं को पढ़ाया जाता था। उन्होंने बताया साहित्य को बढ़ावा देने के लिए मैने भी अपनी 2 किताब लिखी है। उन्होंने कहा आजकल बच्चों को कविताओं और कविताओं के बारे में कम पढ़ाया जाता है। इसलिए मेरा यह प्रयास भी है की वीडियो के माध्यम से लोग कविताओं को जरूर सुने। वरिष्ठ प्रशासक के रूप में प्रदेश की व्यवस्था को करीब से समझने वाले विजय वर्धन का व्यक्तित्व अब एक वॉइस आर्टिस्ट के रूप में भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। विजय वर्धन की आवाज में गंभीरता, स्पष्टता और प्रभावशीलता दिखाई देती है। प्रशासनिक सेवा के दौरान संवाद और नेतृत्व का जो अनुभव उन्होंने हासिल किया, उसका प्रभाव उनकी वॉइस आर्टिस्ट्री में भी नजर आता है। यही कारण है कि उनकी आवाज में प्रस्तुतियां सुनने वालों तक प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं।
।https://youtu.be/JCobRNNWGVo?si=pA3-5SWl4gckk56c
*प्रशासनिक अनुभव बना कला की ताकत*
पूर्व मुख्य सचिव के तौर पर विजय वर्धन ने हरियाणा के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सरकारी व्यवस्था, नीतियों और जनसरोकारों की गहरी समझ ने उनके व्यक्तित्व को व्यापक बनाया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने अनुभवों को केवल सामाजिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि साहित्य, संस्कृति और आवाज की कला जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में भी सक्रियता दिखाई। विजय वर्धन ने सम्पादक राणा ओबराय के एक सवाल के जवाब में बताया की 16 अगस्त को पाकिस्तान औऱ हिंदुस्तान के लोग हांगकांग में आजादी दिवस मनाते हैं। हमने वहाँ भी अपना कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं।
उनकी वॉइस आर्टिस्ट के रूप में सक्रियता इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। प्रशासनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच विकसित हुई उनकी रुचियां अब रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बन रही हैं।
*बहुआयामी व्यक्तित्व की मिसाल*
विजय वर्धन को केवल एक पूर्व नौकरशाह के रूप में नहीं, बल्कि बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में देखा जा सकता है। प्रशासनिक अनुभव, अध्ययन, साहित्य और कला के प्रति रुचि ने उनके व्यक्तित्व को अलग आयाम दिया है। उनकी आवाज में अनुभव की गंभीरता और अभिव्यक्ति में सहजता दिखाई देती है।
विजय वर्धन की यह नई पहचान उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायक है जो मानते हैं कि पेशेवर जीवन के बाद व्यक्ति अपनी रुचियों और प्रतिभाओं को नए मंच पर सामने ला सकता है। प्रशासन की ऊंची जिम्मेदारी संभालने के बाद 80 टेली फिल्मों में अपनी आवाज देने वाले वॉइस आर्टिस्ट के रूप में विजय वर्धन की सक्रियता उनके व्यक्तित्व के रचनात्मक पक्ष को सामने लाती है। कला औऱ साहित्य की दुनिया मे लगातार आगे बढ़ते हुए पूर्व सीएस विजय वर्धन को हरियाणा साहित्य अकादमी तथा हरियाणा उर्दू अकादमी, हरियाणा सरकार के पूर्व वाईस चेयरमैन तथा सम्पादक राणा ओबराय ने भी अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा साहित्य के क्षेत्र में भी आप इसी तरह बुलंदियों को छूते हुए आगे बढ़ते रहे।

