*पूर्व एचसीएस अधिकारी तोमर के मामले ने सरकार की कार्यप्रणाली पर उठने लगे गंभीर सवाल / उजागर हुई प्रशासनिक कमियां?*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*पूर्व एचसीएस अधिकारी तोमर के मामले ने सरकार की कार्यप्रणाली पर उठने लगे गंभीर सवाल / उजागर हुई प्रशासनिक कमियां?*
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चंडीगढ़ ;- हरियाणा के रिटायर्ड एचसीएस अधिकारी एलपीएस तोमर से जुड़े मामले ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व एचसीएस अधिकारी के साथ हुई कथित ज्यादतियों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एलपीएस तोमर अब यह सवाल उठ रहे है कि क्या मेरे केस में निर्धारित नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन किया गया था? तोमर मामले को लेकर सरकार और प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग उठा रहे है कि उनके विरुद्ध की गई एकतरफा कार्रवाई का आधार क्या था, उन्होंने बताया कि मुझे अपना पक्ष रखने का पूरा पर्याप्त अवसर भी नही मिला औऱ मुझे जबर्दस्ती रिटायर कर दिया गया। एक प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा मामला होने के कारण इसकी गंभीरता और सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। यदि किसी अधिकारी को ऐसा लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो उसकी शिकायत अथवा कानूनी अधिकारों पर निष्पक्ष तरीके सरकार को विचार करना चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए यह अति आवश्यक भी है।
*सरकार की कार्यशैली पर सवाल*
अब निगाहें हरियाणा सरकार पर हैं कि वह पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करती है या नहीं। सरकार को चाहिए कि संबंधित रिकॉर्ड, आदेश और कार्रवाई के आधार सार्वजनिक करे, ताकि यह साफ हो सके कि मामला नियमसम्मत प्रशासनिक कार्रवाई का है या अधिकारी के साथ वास्तव में कोई अन्याय हुआ।
*सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग*
एलपीएस तोमर प्रकरण में यदि शिकायतें और आरोप गंभीर हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर तथ्यों को सामने लाना जरूरी है। इससे न केवल संबंधित अधिकारी को न्याय मिलेगा, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों का विश्वास भी मजबूत होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हरियाणा सरकार एलपीएस तोमर मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी?
*14 सितंबर को भी लिखा, हरियाणा सरकार की नाकामी के कारण अपने हक को पाने के लिए भटकता एक HCS!*
आजकल हरियाणा प्रदेश में जोरो से चर्चा है कि नायब सरकार के राज में प्रदेश के किसी भी व्यक्ति, अधिकारी, कर्मचारी के साथ नाइंसाफी नही हो सकती हैं। कह सकते यह एक अच्छी चर्चा है, लेकिन इसके विपरीत एक एचसीएच अधिकारी एलपीएस तोमर के साथ लगभग 20 वर्षों से सरकार द्वारा अन्याय होता आ रहा है। हरियाणा सरकार के तत्कालीन बड़े अधिकारियों की ईगो औऱ षड्यंत्र के शिकार बने एचसीएस तोमर ने नायब सरकार के दरबार मे भी अनेको बार इंसाफ के लिए दरख्वास्त लगाई थी। मगर लोकप्रिय नायब सरकार में भी उन्हें इंसाफ नही मिला। भाजपा सरकार में नियुक्त अधिकारी तोमर को दिनरात चकमा तो देते रहे मगर इंसाफ नही दिया। तत्कालीन तीन एचसीएस अधिकारियों क्रमशः एलपीएस तोमर, वाईएस ख्यालिया तथा आरएस चहल को चार्जशीट किया गया था। तीनो के खिलाफ जांच कमेटी का गठन हुआ था। एलपीएस तोमर का आरोप है कि तत्कालीन अधिकारीयों ने पक्षपात करते हुए दोनों को दोषमुक्त कर दिया औऱ मुझे दण्डित कर दिया। तोमर ने बताया की मैने उच्च अधिकारियों को लिखा कि मैं निर्दोष हूँ। मेरी प्रार्थना पर सरकार ने फिर एक IAS अधिकारी को इन्क्वारी अफसर नियुक्त किया। इन्क्वारी अफसर ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा की एलपीएस तोमर गिल्टी नही है। उन्होंने बताया जब मैं गुलहा में एसडीएम था तब कैथल की उपायुक्त ने भी अपनी रिपोर्ट में मेरे को वेरी गुड अफसर लिखा था। सभी रिपोर्ट एलपीएस तोमर के हक में होने के बावजूद सरकार ने उन्हें जबरन रिटायर कर दिया था। अब दशकों से न्याय पाने के लिए रिटायर्ड एचसीएस एलपीएस तोमर सरकार के आगे लगातार गुहार लगाते घूम रहे हैं। लेकिन न्याय पाने में नाकामयाब रहे हैं। अब देखना यह है कि तत्कालीन बड़े अधिकारियों की ईगो औऱ षड्यंत्र के शिकार बन चुके एचसीएस अधिकारी को नायब सरकार कितनी जल्दी इंसाफ और दोषियों को दंड देती है।

