Saturday, December 23, 2023
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दलबदल की राजनीति करने वाले पूर्व सांसद अवतार भड़ाना न घर के रहे न घाट के!*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज़,
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दलबदल की राजनीति करने वाले पूर्व सांसद अवतार भड़ाना न घर के रहे न घाट के!*
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चंडीगड़ ;- पुरानी कहावत पूरी तरह अवतार भड़ाना पर चरितार्थ हो रही है। लोग इस बात का चटखारा लेते नजर आ रहे हैं कि अवतार भड़ाना के साथ यही होना था। क्योंकि चुनाव हारते ही इन्होंने कई पार्टियों का दामन थामा और अभी हाल फिलहाल में विधायकी छोड़कर कांग्रेस के पंजे का दामन थाम लिया था। लेकिन पंजे ने ऐसा झपटा मारा की अवतार की राजनीतिक जीवन का ही अंत दिखाई पड़ रहा है। सूत्रों की माने तो चश्मा उतारने वाले बिना हाथ के चप्पल पहनकर झाड़ू लगाने को भी तैयार हो रहे हैं! सूत्र की माने तो अवतार भड़ाना जजपा और आप गठबंधन से उम्मीदवार हो सकते हैं! परन्तु यह तो भविष्य ही बताएगा कि आखिर अवतार भड़ाना किस पार्टी से टिकट लाते हैं या निर्दलीय ही दावा पेश करते हैं?

* भड़ाना को भूपेन्द्र हुड्डा से पंगा महंगा पड़ा ?
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कहते हैं राजनीति हो या समाजिक या सामान्य जीवन हो हर किसी का वक्त आता है। किसी समय में फरीदाबाद लोकसभा में अवतार भड़ाना की तूती बोलती थी। लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली की इस बार उन्हें टिकट के भी लाले पड़ गए। इसके मुख्य कारणों पर गौर किया जाए तो उनका निरंतर पार्टी बदलना और साथ ही भीतरघात भी है। खास तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से बैर उनको महंगा पड़ा। पिछले चुनाव में भी उनकी नाराजगी खासतौर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा से देखी गई थी वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पूर्णता अवतार भड़ाना का साथ नहीं दिया था। इन खबरों से बाजार गर्म रहा। जिसके चलते अवतार भड़ाना लगभग साडे 4 लाख वोटों से चुनाव हार गए। उसके बाद उन्होंने पार्टी बदल ली। आज के समय में हरियाणा कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्य धुरी माने जाते हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा अवतार भड़ाना की टिकट कटने के मुख्य कारणों में से एक माना जा रहा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा से नाराजगी अक्सर अवतार भड़ाना ने जाहिर की थी। उन्होंने बार-बार आरोप लगाए थे कि सांसद होते हुए उनकी अनदेखी की जा रही है। वहीं भाजपा विधायक का पक्ष लिया जाता है। वे यह इशारा मौजूदा सांसद कृष्णपाल की तरफ करते थे। आखिरकार समय पर हुड्डा ने अपना तीर चला और अवतार भड़ाना की टिकट कट गई। इसीलिए बड़े बुजुर्गों ने कहा है राजनीतिक जीवन मे कभी भी दूसरे को छोटा नही समझना चाहिए।

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