Friday, May 15, 2026
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यू.टी. चंडीगढ़ में आबकारी एवं कराधान विभाग की समीक्षा बैठक में अतिरिक्त आबकारी नीति को सराहा / 2025-26 में चंडीगढ़ को मिला 965.71 करोड़ रुपये का राजस्व*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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यू.टी. चंडीगढ़ में आबकारी एवं कराधान विभाग की समीक्षा बैठक में आबकारी नीति को सराहा / 2025-26 में चंडीगढ़ को मिला 965.71 करोड़ रुपये का राजस्व*
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चंडीगढ़ ;- यू.टी. चंडीगढ़ में आबकारी एवं कराधान विभाग की समीक्षा बैठक शुक्रवार को मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विभाग के राजस्व संग्रह, नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन, जीएसटी प्रवर्तन तथा अवैध शराब कारोबार पर नियंत्रण को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में सचिव (आबकारी एवं कराधान) दिप्रवा लाकड़ा, आबकारी एवं कराधान आयुक्त निशांत कुमार यादव, अतिरिक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त-सह-उप आबकारी एवं कराधान कलेक्टर (आबकारी) प्रद्युम्न सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान विभाग ने जानकारी दी कि आबकारी नीति वर्ष 2025-26 के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन को 965.71 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त हुआ है। मीटिंग में सह-उप आबकारी एवं कराधान कलेक्टर (आबकारी) प्रद्युम्न सिंह के प्रयासों को खूब सराहा गया।अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए 97 खुदरा शराब ठेकों में से 96 ठेकों का सफलतापूर्वक आवंटन किया जा चुका है। विभाग के अनुसार इन ठेकों के लिए 450 करोड़ रुपये का आरक्षित मूल्य तय किया गया था, जबकि नीलामी में कुल 560.85 करोड़ रुपये की बोली प्राप्त हुई, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विभाग ने मुख्य सचिव को यह भी अवगत कराया कि आबकारी नीति वर्ष 2026-27 के तहत निर्धारित 1000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 1009 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व एकत्रित होने की संभावना है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 में जीएसटी के तहत 2,454 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रहित किया गया है, जिसे विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि बताया।
बैठक में नई आबकारी नीति के अंतर्गत लागू किए गए सुधारात्मक उपायों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि अब शराब ब्रांडों के लेबलों का ऑटो-रिन्यूअल किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। इसके अलावा आबकारी लाइसेंसधारकों को रियल-टाइम स्टॉक इन्वेंट्री बनाए रखना अनिवार्य किया गया है, ताकि शराब की बिक्री और स्टॉक की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।विभाग ने यह भी बताया कि डिपार्टमेंटल स्टोर्स में शराब लाइसेंसों की पुनः शुरुआत की गई है तथा शराब परिवहन के लिए जीपीएस-सक्षम वाहनों का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इन कदमों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, निगरानी को मजबूत करना तथा नियामकीय अनुपालन को सख्ती से लागू करना है।
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रवर्तन गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा सभी आबकारी लाइसेंसधारकों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि आबकारी नीति और संबंधित नियमों का उल्लंघन करने वाले लाइसेंसधारकों के खिलाफ तुरंत उल्लंघन संबंधी कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने अवैध शराब की आवाजाही और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी आवश्यक निवारक और दंडात्मक उपाय अपनाने पर विशेष जोर दिया। मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी स्तर पर अवैध कारोबार को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में चंडीगढ़ क्षेत्राधिकार में स्थित सभी कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस का विभाग के साथ विधिवत पंजीकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन न करने वाले मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जीएसटी प्रवर्तन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को करदाताओं का विस्तृत विश्लेषण करने और कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) दावों तथा फर्जी फर्मों और संस्थाओं से जुड़े मामलों की पहचान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे डिफॉल्टर करदाताओं के खिलाफ कानून के प्रावधानों के तहत उचित कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए सतत निगरानी, समन्वित प्रवर्तन कार्रवाई और वैधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन बेहद आवश्यक है।

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