प्रशासन का मानना नई नीति से न केवल राजस्व में होगी वृद्धि / व्यवस्था में पारदर्शिता और नियंत्रण भी होगा मजबूत*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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प्रशासन का मानना नई नीति से न केवल राजस्व में होगी वृद्धि / व्यवस्था में पारदर्शिता और नियंत्रण भी होगा मजबूत*
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चंडीगढ़ :- आबकारी एवं कराधान विभाग चंडीगढ़ के मुखिया प्रद्युम्न सिंह ने एक बार फिर सफलता के झंडे गाड़ते हुए आबकारी विभाग को आर्थिक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। उनकी गाइडलाइंस के कारण आबकारी नीति से यूटी चंडीगढ़ को काफी मुनाफा होगा। चंडीगढ़ यूटी के आबकारी एवं कराधान विभाग की नई आबकारी नीति 2026–27 को पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक द्वारा मंजूरी दे दी गई है। इस नई नीति में पारदर्शिता, तकनीक आधारित ई-टेंडरिंग और राजस्व बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि नीति में एकाधिकार (मोनोपॉली) पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही बार द्वारा शराब की खरीद, इंटर-वेंड ट्रांसफर, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।
*ई-टेंडरिंग में शानदार प्रतिसाद, राजस्व में भारी बढ़ोतरी*
25 मार्च 2026 को आयोजित ई-टेंडरिंग के दूसरे चरण में 11 वेंड्स के लिए 19 बोलियां प्राप्त हुईं। इस चरण में विभाग को 53.94 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइस के मुकाबले 62.38 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो कि 15.64% की वृद्धि दर्शाता है। इसके अलावा 38 लाख रुपये बतौर भागीदारी शुल्क भी प्राप्त हुए।
इससे पहले 19 मार्च 2026 को हुए पहले चरण में 82 वेंड्स के लिए 195 बोलियां प्राप्त हुई थीं, जिससे विभाग को 376.24 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइस के मुकाबले 487.68 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो 29% की वृद्धि है। इस चरण में 3.90 करोड़ रुपये की भागीदारी फीस भी जमा हुई।
*कुल 93 वेंड्स से 550 करोड़ से अधिक की आय*
दोनों चरणों को मिलाकर 93 रिटेल वेंड्स के खिलाफ विभाग ने 430.18 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइस के मुकाबले 550.06 करोड़ रुपये का कुल राजस्व अर्जित किया है, जो लगभग 28% की बढ़ोतरी है। साथ ही 4.28 करोड़ रुपये की भागीदारी फीस भी प्राप्त हुई है। विभाग ने शेष 4 लाइसेंसिंग यूनिट्स के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। बोलीदाताओं से मिले जबरदस्त प्रतिसाद को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि सभी वेंड्स का आवंटन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया जाएगा और तय लक्ष्य से कहीं अधिक राजस्व प्राप्त होगा।
इस सफलता के बाद विभाग अब नीति में शामिल अन्य प्रावधानों को लागू करने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। प्रशासन का मानना है कि नई नीति से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और नियंत्रण भी मजबूत होगा

