Monday, January 5, 2026
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राणा ओबराय राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, चंडीगढ़ पीजीआई के 1.14 करोड़ रुपये घोटाले में सोमवार होगी सुनवाई / मरीजों की ग्रांट हड़पने मामले में CBI ने 8 पर दर्ज की FIR*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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चंडीगढ़ पीजीआई के 1.14 करोड़ रुपये घोटाले में सोमवार होगी सुनवाई / मरीजों की ग्रांट हड़पने मामले में CBI ने 8 पर दर्ज की FIR*
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चंडीगढ़ PGI में 1.14 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में 3 आरोपी सुनील कुमार, गगनप्रीत सिंह और चेतन गुप्ता ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई कोर्ट ने मामले में सुनील कुमार और गगनप्रीत सिंह की याचिका को खारिज कर दिया। तीसरे आरोपी चेतन गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार PGI के प्राइवेट ग्रांट से जुड़े 6 लोग मरीजों को मिलने वाला पैसा निजी खातों में डलवा रहे थे। इस मामले में CBI ने पीजीआई के 6 कर्मचारियों और 2 अन्य लोगों समेत 8 के खिलाफ FIR दर्ज की है। CBI जांच में सामने आया है कि यह पूरा स्कैंडल आरोपी एक फोटोकॉपी वाले की दुकान से चला रहे थे। इसमें दुकान के मालिक को भी आरोपी बनाया गया है। एक मरीज ने इलाज के रुपए न मिलने के बाद पीजीआई प्रशासन से इसकी शिकायत की थी। इसके बाद पीजीआई प्रशासन ने प्रोफेसर डॉ. अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की। जिसके बाद केस सीबीआई के पास गया। आरोपी फोटोकॉपी की दुकान से मरीजों को मिलने वाली ग्रांट की रकम फर्जी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवाते थे। साथ ही मरीजों के नाम पर मिलने वाली महंगी दवाएं अवैध रूप से बाजार में बेच दी जाती थी।
*खुलासा* ;- मरीज के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किए रुपए: घोटाले का खुलासा तब हुआ जब लाभार्थी मरीज कमलेश देवी (फाइल नंबर 18796) के पति ढाई लाख रुपए की स्वीकृत ग्रांट से दवा लेने प्राइवेट ग्रांट सेल पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि उनकी फाइल नष्ट कर दी गई है और डिजिटल रिकॉर्ड भी डिलीट है। इसके बाद जांच में सामने आया कि करीब 22 लाख रुपए निवास यादव नामक के एक अकाउंट में ट्रांसफर किए गए हैं, जबकि इसका मरीज से कोई संबंध नहीं था।
हॉस्पिटल अटेंडेंट के अकाउंट में फर्जी ट्रांसफर: कमलेश ने PGI प्रशासन से इसकी शिकायत की। इसके बाद PGI प्रशासन ने मामले में एक कमेटी का गठन किया। डा. अरुण की अध्यक्षता में बनी कमेटी को कई खामियां मिलीं, जिसमें एक अन्य मरीज अरविंद कुमार (फाइल नंबर 20404) को मिलने वाली राशि में से 90 हजार रुपए हॉस्पिटल अटेंडेंट नेहा के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इसके बाद और जांच हुई तो, इनमें जांच समिति को 11 ऐसे अकाउंट मिले, जिनमें फर्जी तरीके से खुद को मरीज का परिवार बताकर 19 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए गए थे।
*दवा विक्रेताओं को भेजे रुपए* वहीं, ग्रांट सेल ने दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित पांच मरीजों के इलाज के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि और अन्य संस्थाओं से मिले 61.75 लाख रुपए में से 38 लाख 946 रुपए बिना किसी डॉक्टर की पर्ची के सीधे दवा विक्रेताओं के खातों में भेज दिए गए। हैरानी की बात यह है कि इन 5 मरीजों में से 2 की पहले ही मौत हो चुकी थी।
70 मामलों में गड़बड़ी, फाइलें गायब: पीजीआई की इंटरनल कमेटी की जांच में सामने आया कि, 2017 से अक्टूबर 2021 तक के रिकॉर्ड की जांच की गई। इसमें ऐसे 70 और मामले सामने आए। इनमें 17 मामलों में दवा सप्लायरों के असली बिलों में छेड़छाड़ कर 2 बार भुगतान लिया गया। वहीं, 37 मरीजों की असली फाइलें रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब पाई गईं।
पीजीआई चंडीगढ़।
2 पॉइंट में पढ़िए स्कैंडल में कौन शामिल!
1.फोटोकॉपी की दुकान से चलाया स्कैंडल: PGI की प्राइवेट ग्रांट से जुड़े कर्मचारी PGI के पास स्थित गोल मार्केट में एक फोटोकॉपी दुकान से अपना स्कैंडल चलाते थे। आरोपी मरीजों को मिलने वाली ग्रांट को फर्जी खातों में ट्रांसफर करा देते थे। फोटोकॉपी दुकान के मालिक दुर्लभ कुमार, साहिल सूद और उनके रिश्तेदारों के खातों में रुपए ट्रांसफर किए थे, जिसे इन्होंने आपस में बांट लिया।
2. प्राइवेट ग्रांट सेल में सामने आईं गड़बड़ी: जांच के दौरान सीबीआई ने पीजीआई, संबंधित विभागों और विभिन्न बैंकों से रिकॉर्ड जुटाए। इनमें पीजीआई की प्राइवेट ग्रांट सेल में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। यह सेल विभिन्न विभागों से मिलने वाली ग्रांट का प्रबंधन करती है। इसके बाद इसी सेल के जरिए मरीजों को आर्थिक मदद और दवाएं दी जाती हैं।
3. दवा कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में सीबीआई इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है। साथ ही एचएलएल लाइफ केयर, आर कुमार मेडिकोज, कुमार एंड कंपनी और मारुति मेडिकोज की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है, हालांकि अभी इन कंपनियों को आरोपी नहीं बनाया गया है।

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