Friday, June 21, 2024
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सत्ता की चाहत ने चट्टान की तरह मजबूत भाइयो अजय चौटाला और अभय चौटाला को किया दो फाड़*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज़,
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सत्ता की चाहत ने चट्टान की तरह मजबूत भाइयो अजय चौटाला और अभय चौटाला को किया दो फाड़*
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चंडीगढ़ ;- चंडीगढ़ के सेक्टर-२७ स्थित जाट भवन में आयोजित पार्टी के भव्य समारोह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे विधायकों, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने चौधर ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व पर एक बार फिर से भरोसा जता दिया। इस बात की जानकारी एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने दी। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों, सांसदों, पदाधिकारियों और कार्यकारिणी के सदस्यों को अपने साथ लाने का दावा करने वाले उनके बड़े भाई अजय चौटाला के दावे आज झूठे साबित हुए। अभय चौटाला ने कहा कि अजय ने यह दावा किया था कि पार्टी कार्यकर्ताओं व विधायकों की आस्था अब पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के साथ न होकर उनके (अजय) के साथ हो जाएगी। लेकिन आज यह साबित हो गया कि पार्टी के लोग किसके साथ खड़े हैं। इससे दूसरे खेमे में बड़ी परेशानी पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि आगामी पहली दिसंबर से इनेलो की अधिकार यात्रा एक बार फिर शुरू की जाएगी। इस दौरान केवल आगामी संसदीय चुनावों में प्रदेश की सभी १० सीटों को अपने पक्ष में करने और उसके बाद विधानसभा चुनाव के दौरान भी ज्यादा सीटों पर कब्जा कर बहुमत से इनेलो की सरकार बनाना ही उनका मुख्य उद्देश्य रहेगा। अभय चौटाला ने कहा कि अगला चुनाव बसपा के साथ मिलकर लड़ा जाएगा। यह प्रस्ताव इनेलो की शनिवार की कार्यकारिणी में सर्वसम्मति से पारित किया गया। उन्होंने कहा कि इस बात का भी गलत प्रचार किया गया कि अजय चौटाला को ओम प्रकाश चौटाला का आशीर्वाद प्राप्त है। उन्होंने कहा कि चौटाला साहब को पता है कि उनके संघर्ष के साथी कौन से लोग हैं। चौटाला ऐसा व्यक्तित्व है कि १० साल की सजा के बाद भी अपने मार्ग और संकल्प से डिगे नहीं। इस मामले को हल्के में लेकर बड़े भाई अजय ने बड़ी भूल की है। अभय का कहना था कि बीते ७ अक्टूबर को सम्मान दिवस समारोह में कुछ लोगों ने माहौल खराब करने की कोशिश की। इस दौरान अनुशासनहीनता पैदा करने का प्रयास भी किया गया। चौटाला साहब को भी उपेक्षित करने के भरसक प्रयास हुए, लेकिन वह इन बातों से डिगने वाले नहीं। अभय ने कहा कि इसके बाद उनके साथ भी धक्केशाही की गई, फिर भी वह शांत थे। फिर दिल्ली जाकर बड़े भाई (अजय) से बात की। वहां से भी कोई नतीजा नहीं निकलने पर पार्टी अध्यक्ष अशोक अरोड़ा को जिम्मेदारी सौंपी गई कि उनसे जाकर पूछे कि दिक्कत क्या है। इसका भी कोई असर नहीं हुआ। खैर, पार्टी अध्यक्ष ने यह शर्त रखी कि गोहाना रैली में अनुशासनहीनता के लिए जिम्मेदार लोग क्षमा मांगें तो मामला सुलझ सकता है। लेकिन माफी मांगने की बजाय उन्होंने शनिवार की जींद रैली का आह्वान कर पार्टी को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। लेकिन उनके सारे प्रयास विफल रहे जिसका नतीजा आज सबके सामने है। अभय का यह भी दावा था कि अजय षड्यंत्र का शिकार हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष का पद भाभी को देने के लिए मैं इस्तीफा देने को तैयार
इस मौके पर उन्होंने भाभी नैना चौटाला द्वारा उन्हें गुंडा कहे जाने पर उन्हें घेरा। अभय ने कहा, ‘भाई अजय चौटाला की शादी को 32 साल हो चुके हैं, लेकिन आज मैं उन्हें गुंडा दिखने लगा हूं। इससे पहले तो सबठीक ठाक था, लेकिन निष्कासन के बाद मैं उनके लिए गुंडा हो गया हूं।’ साथ ही उन्होंने कहा कि अगर भाभी नैना चौटाला को नेता प्रतिपक्ष का पद चाहिए तो वे बिना किसी परेशानी के अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार है। बता दें कि शुक्रवार को ऐलनाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान नैना चौटाला ने अभय पर निशाना साधते हुए कहा था कि अभय चौटाला भले ही साधु का चोला डाल ले, लेकिन उसने भाई अजय सिंह को पार्टी से निकालकर ये दिखा दिया कि मैं गुंडा हूं, गुंडा ही रहूंगा। किसी अन्य पार्टी में शामिल होने के जुगाड़ में आगामी 9 दिसंबर को अजय द्वारा नई पार्टी की घोषणा को लेकर किए गए सवाल के जवाब में अभय का कहना था कि 9 तक वह किसी अन्य पार्टी में शामिल होने के जुगाड़ में होंगे। उन्होंने कहा कि अजय के बच्चों ने भी दादा से माफी नहीं मांगी, फिर किस प्रकार के सम्मानजनक समझौते की बात करते हैं। अभय ने कहा कि चौटाला साहब का युग खत्म होने की बात कहकर सत्रहवीं कराने की बात की गई। लेकिर बड़ों पर किए गए कटाक्ष वह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
समझौते का हरसंभव प्रयास किया : अरोड़ा
बाद में प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि सुलह के सभी प्रयास विफल हो गए। अभय सिंह चौटाला ने हर संभव प्रयास कर पार्टी का कलह से दूर करने का प्रयास किया। लेकिन दूसरी तरफ से कोई सहयोग नहीं मिला जिसके परिणामस्वरूप आज की विशेष बैठक बुलानी पड़ी। उन्होंने दावा कि पहली दिसंबर से होने वाली अधिकार यात्रा में पार्टी के रहे-सहे कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़ जाएंगे .

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