*हरियाणा में वरिष्ठता औऱ मेरिट के आधार पर मिलेगी पदोन्नति / सरकार ने अनुसूचित जाति के अधिकारियों की पदोन्नति में मिलने वाले आरक्षण पर लगाई रोक*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*हरियाणा में वरिष्ठता औऱ मेरिट के आधार पर मिलेगी पदोन्नति / सरकार ने अनुसूचित जाति के अधिकारियों की पदोन्नति में मिलने वाले आरक्षण पर लगाई रोक*
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चंडीगढ़ :- हरियाणा सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) के अधिकारियों की पदोन्नति में मिलने वाले आरक्षण पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस पर हाई कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक यह रोक जारी रहेगी। सरकार ने इस संबंध में मानव संसाधन विभाग के 19 दिसंबर 2023 के पुराने निर्देशों की जगह नए आदेश जारी किए हैं।
*क्रीमी लेयर को आरक्षण का लाभ नहीं*
हरियाणा सरकार ने यह फैसला कमलजीत सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य मामले में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की ओर से दिए गए एक अप्रैल के आदेश के बाद लिया है। इसमें कोर्ट ने एससी अधिकारियों को पदोन्नति में 20 प्रतिशत आरक्षण देने की सरकार की नीति को सही माना था मगर कोर्ट ने यह शर्त भी लगाई कि क्रीमी लेयर को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। सरकार ने इस शर्त को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की है जिस पर अभी सुनवाई चल रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला केवल पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ा है। ग्रुप-ए और ग्रुप-बी पदों पर सीधी भर्ती में लागू आरक्षण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नए आदेशों के अनुसार, 7 अक्तूबर 2023 की आरक्षण नीति के तहत एससी अधिकारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देते हुए नई पदोन्नतियां नहीं की जाएंगी। आरक्षित पद खाली रखे जाएंगे ताकि बाद में कोर्ट के फैसले के अनुसार व्यवस्था की जा सके। हालांकि जिन एससी कर्मचारियों की पदोन्नति सेवा नियमों के अनुसार वरिष्ठता और योग्यता (सीनियरिटी-कम-मेरिट) के आधार पर बनती है उनकी पदोन्नति नहीं रोकी जाएगी। उन्हें सामान्य प्रक्रिया के तहत पदोन्नति मिलती रहेगी।
*वरिष्ठता-कम-मेरिट के आधार पर पदोन्नति मिलेगी*
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे एससी अधिकारी, जिन्हें वरिष्ठता-कम-मेरिट के आधार पर पदोन्नति मिलेगी उन्हें भी 20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की नीति में शामिल माना जाएगा। इसके अलावा जिन विभागों में एससी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व पहले से 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा है वहां भी योग्य कर्मचारियों की पदोन्नति पर सेवा नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा। किसी कर्मचारी को केवल इसलिए पदोन्नति से नहीं रोका जाएगा कि आरक्षित प्रतिनिधित्व पहले ही पूरा हो चुका है।

