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सांसद भाटिया ने कहा बेटियों को आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहिए/ ‘समय बर्बाद न करें, शिक्षा और स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता’*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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सांसद भाटिया ने कहा बेटियों को आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहिए/ ‘समय बर्बाद न करें, शिक्षा और स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता’*
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पानीपत ;- भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद संजय भाटिया ने मंगलवार को शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों, विशेषकर बेटियों के साथ आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने बेटियों को शिक्षा, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, लक्ष्य को लेकर दृढ़ संकल्प और स्वयं पर विश्वास व्यक्ति को आगे बढ़ने की ताकत देता है।
संजय भाटिया ने बेटियों से संवाद करते हुए कहा कि कई बार परिवार की आर्थिक परिस्थितियां, सामाजिक सोच या कम उम्र में विवाह जैसी परिस्थितियां लड़कियों की शिक्षा के रास्ते में चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि बेटियां अपनी पढ़ाई को गंभीरता से लें और अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित करें, जिसे हासिल करने के लिए वे पूरी मेहनत और लगन से जुट जाएं। उन्होंने कहा कि “पहले अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास पैदा करें, उसके बाद जीवन के दूसरे फैसले करें।” उन्होंने कहा कि विवाह जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन विवाह के बाद परिस्थितियां हमेशा व्यक्ति के अनुकूल रहें, यह जरूरी नहीं है। इसलिए हर बेटी के अंदर यह विश्वास होना चाहिए कि “मैं अपने दम पर कुछ कर सकती हूं।” यही आत्मविश्वास उसे जीवन की किसी भी परिस्थिति का सामना करने की शक्ति देता है।
युवाओं को समय का महत्व समझाते हुए संजय भाटिया ने कहा कि आज की उम्र सीखने और अपनी क्षमता को विकसित करने की उम्र है। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ नई चीजें सीखना अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है, जबकि युवावस्था में सीखने और नई चीजों को ग्रहण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है।
उन्होंने युवाओं से मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग की अपील करते हुए कहा कि Reels देखने में घंटों समय बिताने के बजाय उस समय का उपयोग ज्ञान, कौशल और अपने भविष्य को बेहतर बनाने में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में रुचि और प्रतिभा है, उसमें पूरी मेहनत से आगे बढ़ें और अपने समय को व्यर्थ न जाने दें। संजय भाटिया ने बेटियों से स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को लेकर भी खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि अच्छी सेहत जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने युवाओं से कहा कि अपने कद, रंग, चश्मा लगाने, शारीरिक कमजोरी या किसी अन्य कमी को लेकर हीनभावना नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खूबसूरती केवल चेहरे या बाहरी व्यक्तित्व में नहीं, बल्कि इंसान के मन, व्यवहार और सोच में होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी खूबियों को पहचानकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
*‘हर इंसान में परमात्मा का रूप देखें, सकारात्मक सोच से बदल सकती है दुनिया’*
आध्यात्मिकता और सकारात्मक सोच का संदेश देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि जीवन में मन को परमात्मा से जोड़कर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें प्रत्येक व्यक्ति में अच्छाई और परमात्मा का रूप देखने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सामने वाला व्यक्ति यदि कुछ कमियां रखता भी है तो उसके प्रति नकारात्मकता या गुस्सा रखने के बजाय अपनी अच्छाई और सकारात्मक व्यवहार से उसे बदलने का प्रयास करना चाहिए। कई बार व्यक्ति का अच्छा व्यवहार सामने वाले के सोचने और व्यवहार करने के तरीके में भी सकारात्मक बदलाव ला देता है।
‘दूसरों से तुलना नहीं, जो हमारे पास है उसकी कद्र करें’
संजय भाटिया ने अपनी माता से जुड़ी एक सीख साझा करते हुए कहा कि उनकी मां अक्सर कहती थीं कि “जो तेरे पास है, वही तेरे लिए सबसे बेस्ट है।” उन्होंने इस बात को जीवन में संतोष और सकारात्मक सोच से जोड़ते हुए कहा कि हमें दूसरों की सुख-सुविधाओं को देखकर अपने जीवन को कमतर नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी दूसरे के पास बाइक है और हमारे पास साइकिल है तो दूसरे की बाइक देखकर परेशान होने से हमारा कोई लाभ नहीं है। हमारे लिए वही साइकिल महत्वपूर्ण है, जिससे हम अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। इसी तरह उन्होंने माता-पिता के प्रति कृतज्ञता का भाव रखने की अपील करते हुए कहा कि हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं। किसी की मां दो सब्जियां बनाकर खाना भेजती है, किसी के घर में साधारण भोजन बनता है, लेकिन माता-पिता अपनी क्षमता के अनुसार बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करते हैं। इसलिए बच्चों को दूसरों के परिवारों से अपने परिवार की तुलना करने के बजाय अपने माता-पिता के त्याग और प्रेम को समझना चाहिए। युवाओं को बड़ा सपना देखने और अपनी परिस्थितियों को बदलने का संदेश देते हुए संजय भाटिया ने कहा कि आर्थिक स्थिति कभी भी सफलता का अंतिम पैमाना नहीं होती। सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति के भीतर अपने लक्ष्य को हासिल करने का कितना जुनून और संकल्प है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी के पिता ने फैक्ट्री में मजदूरी की है तो बेटा यह सपना देख सकता है कि एक दिन वह अपनी फैक्ट्री लगाएगा और दूसरे लोगों को रोजगार देगा। यदि पिता 10-20 हजार रुपये की नौकरी करते रहे हैं तो बेटा यह लक्ष्य रख सकता है कि वह आगे चलकर 20 युवाओं को रोजगार देगा। उन्होंने कहा कि “पैसे वाला व्यक्ति ही अधिक सफल होगा और कम पैसे वाला कम सफल होगा- ऐसा धरती की किसी किताब में नहीं लिखा है। सफलता आपके जज्बे, मेहनत और संकल्प से तय होती है।” संजय भाटिया ने युवाओं से कहा कि अपने माता-पिता, भाई-बहन या पड़ोसियों से अपनी परिस्थितियों को लेकर नाराज होने के बजाय अपनी ऊर्जा को लक्ष्य हासिल करने में लगाएं। उन्होंने कहा कि “जो कुछ हमारे पास है, उसे अपनी मेहनत, कर्म और जुनून से बदलने का संकल्प होना चाहिए। जब मन में यह ठान लिया जाए कि मुझे करना है, तो रास्ते भी निकलते हैं और मंजिल भी हासिल होती है।” इस दौरान विद्यार्थियों ने भी संजय भाटिया के साथ खुलकर संवाद किया और शिक्षा, भविष्य, आत्मनिर्भरता तथा जीवन में सफलता से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार एवं प्रश्न साझा किए। भाटिया ने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी केवल अपने परिवार का नहीं, बल्कि विकसित और सशक्त भारत के निर्माण का आधार है।

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