Tuesday, February 3, 2026
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शहीद IAS एमएल वर्मा की एक फरवरी को ‘आतंकवाद विरोधी दिवस’ के रूप में मनाई जाएगी शहादत / परिवार सहित हुए थे आतंकवादियों की गोलियों का शिकार*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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शहीद IAS एमएल वर्मा की एक फरवरी को ‘आतंकवाद विरोधी दिवस’ के रूप में मनाई जाएगी शहादत / परिवार सहित हुए थे आतंकवादियों की गोलियों का शिकार*
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चंडीगढ़/पंचकूला। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल के प्रधान सचिव रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एमएल वर्मा की शहादत को 1 फरवरी को आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह उनका 34वां शहीदी दिवस है। इस अवसर पर उनके पैतृक गांव ललाहड़ी कला (जिला यमुनानगर) सहित प्रदेश के कई जिलों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
*परिवार सहित आतंकवादी हमले में हुए थे शहीद*
आईएएस अधिकारी एमएल वर्मा उस समय आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हुए, जब वे हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल के प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे।
1 फरवरी 1992 को चंडीगढ़ से गांव कक्कड़माजरा जाते समय आतंकवादियों ने उनकी गाड़ी को निशाना बनाया। इस निर्मम हमले में एमएल वर्मा, उनकी पत्नी प्रीति वर्मा, दो छोटे बेटे गौरव और सौरभ, साथ ही उनके ड्राइवर और गनमैन को गोलियों से भून दिया गया। गाड़ी में सवार सभी छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
*प्रदेश और केंद्र स्तर पर निभाई थी अहम भूमिका*
एमएल वर्मा 1972 बैच के एचसीएस अधिकारी थे और 1988 में आईएएस बने। वे दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के निदेशक रह चुके थे। जब भजन लाल केंद्र सरकार में कृषि मंत्री थे, उस दौरान भी एमएल वर्मा उनके निजी सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके थे।
*लंबे समय से आतंकवादियों के निशाने पर थे*
हरियाणा-पंजाब के बीच एसवाईएल नहर विवाद और राजधानी विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों को राज्य की ओर से एमएल वर्मा ही देख रहे थे। इन्हीं कारणों से वे लंबे समय से आतंकवादियों के निशाने पर थे।
*ईमानदार और साफ छवि के लिए थे जाने जाते*
एमएल वर्मा की पहचान एक ईमानदार, निडर और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में थी। प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच उनकी साफ-सुथरी छवि रही। उनके छोटे भाई आईएएस संजीव वर्मा वर्तमान में अम्बाला मंडलायुक्त के पद पर कार्यरत हैं।
*इन जिलों में मनाया जाएगा शहीदी दिवस*
एमएल वर्मा का शहीदी दिवस हर वर्ष उनके पैतृक गांव ललाहड़ी कला के अलावा कैथल, यमुनानगर, जींद, करनाल और कुरुक्षेत्र जिलों में भी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है।

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