*हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी पर पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा का तीखा हमला! / गुटो में बंटी कांग्रेस कभी नहीं बना पाएगी सरकार / कहा गुटबाजी सत्ता की राह में सबसे बड़ी चुनौती*
*हरियाणा के पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर रणबीर गंगवा एवं सम्पादक राणा ओबराय की खास बातचीत*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी पर पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा का तीखा हमला! / गुटो में बंटी कांग्रेस कभी नहीं बना पाएगी सरकार / कहा गुटबाजी सत्ता की राह में सबसे बड़ी चुनौती*
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चंडीगढ़ ;- हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस की गुटबाजी को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। हरियाणा के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री रणबीर गंगवा ने संपादक राणा ओबराय से खास बातचीत में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। उनके मुताबिक, कांग्रेस में कुमारी शैलजा गुट, भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट और बीरेंद्र सिंह गुट जैसी अलग-अलग राजनीतिक धाराएं हैं। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिए हरियाणा में सत्ता हासिल करना बेहद मुश्किल होगा।
*नेतृत्व की खींचतान बनेगी कांग्रेस की चुनौती*
मंत्री रणबीर गंगवा के बयान ने हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस की एकजुटता और नेतृत्व को लेकर बहस को फिर हवा दे दी है। भाजपा लगातार कांग्रेस पर आरोप लगाती रही है कि पार्टी के नेता सामूहिक रणनीति बनाने के बजाय अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव और नेतृत्व को मजबूत करने में लगे हैं।
*साफ है गंगवा के बयान का राजनीतिक संदेश*
अगर कांग्रेस को हरियाणा में सत्ता की दावेदारी मजबूत करनी है, तो उसे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर साझा नेतृत्व और एकजुट रणनीति दिखानी होगी।
*भाजपा को मिल सकता है राजनीतिक लाभ*
हरियाणा में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। भाजपा नेता कांग्रेस के विभिन्न नेताओं के बीच मतभेदों को उठाकर मतदाताओं के सामने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकते हैं। वहीं कांग्रेस के सामने चुनौती होगी कि वह संगठनात्मक एकता, नेतृत्व के तालमेल और जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्पष्ट रणनीति पेश करे।
*कांग्रेस के सामने एकजुटता की परीक्षा*
रणबीर गंगवा का यह बयान केवल विपक्ष पर राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि हरियाणा में कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति पर उठाया गया सवाल भी है। हालांकि, कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं का वास्तविक आकलन उसके जनाधार, उम्मीदवारों, संगठन और चुनावी मुद्दों के आधार पर ही किया जा सकता है। गुटबाजी का आरोप अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कोई पार्टी भविष्य में सरकार नहीं बना सकती।
अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपने अलग-अलग राजनीतिक खेमों को एक मंच पर लाकर भाजपा को चुनौती दे पाएगी, या फिर आपसी मतभेद ही उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक कमजोरी बने रहेंगे?

