*आत्म-मंथन द्वारा जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन ही सच्ची आध्यात्मिकता*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*आत्म-मंथन द्वारा जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन ही सच्ची आध्यात्मिकता*
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चण्डीगढ़ ;- सच्ची आध्यात्मिकता केवल धार्मिक क्रियाओं, पूजा-पाठ अथवा बाहरी आडम्बरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि आत्म-मंथन के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना ही वास्तविक अध्यात्मिकता है यह विचार श्री जगतार कुरील जी
प्रचारक चंडीगढ़ ने संत निरंकारी सत्संग भवन, सैक्टर-45 में आयोजित इंग्लिश मीडियम समागम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा उन्होंने आगे कहा कि यदि ईश्वर ज्ञान प्राप्त करने के बाद भी मनुष्य के भीतर अहंकार, भेदभाव, ईर्ष्या, निन्दा तथा विकार बने रहें, तो वह आध्यात्मिकता केवल प्रदर्शन बनकर रह जाती है। वास्तविक आध्यात्मिकता वही है, जो मनुष्य के व्यवहार, विचार और चरित्र में विनम्रता, प्रेम, समानता तथा मानवता का संचार करे।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से यह प्रश्न करे कि क्या वह वास्तव में आध्यात्मिक जीवन जी रहा है अथवा केवल धार्मिक होने का दावा कर रहा है। आत्म-मंथन ही वह माध्यम है, जिसके द्वारा मनुष्य अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर कर सकता है। जब तक जीवन में व्यवहारिक परिवर्तन नहीं आता, तब तक आध्यात्मिकता अधूरी रहती है। श्री कुरील ने कहा कि स्थान-स्थान पर समागम के आयोजन करने का उद्देश्य केवल सत्संग सुनाना नहीं, बल्कि प्रत्येक मानव के जीवन में परिवर्तन लाना है। सेवा, सुमिरण और सत्संग तभी सार्थक हैं, जब उनके प्रभाव से मनुष्य के भीतर विनम्रता, सहनशीलता, प्रेम और निष्काम सेवा का भाव विकसित हो। यदि इन साधनों के बावजूद मनुष्य का व्यवहार नहीं बदलता, तो आवश्यक है कि वह पुनः आत्म-मंथन करे। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि मनुष्य को अपने जीवन को एक पुल के समान समझना चाहिए, जिस पर स्थायी निवास नहीं बनाया जा सकता। यह मानव जीवन परमात्मा से जुड़कर आत्मिक मुक्ति प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर है। इसलिए इस अमूल्य जीवन का सदुपयोग करते हुए आत्मज्ञान के प्रकाश में आगे बढ़ना ही जीवन की सफलता है।
उन्होंने समागम में प्रस्तुत विभिन्न प्रेरणादायी प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है। प्रत्येक संत-महात्मा अपने श्रेष्ठ आचरण और जीवन मूल्यों के माध्यम से मिशन का सच्चा प्रचारक बन सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे आत्म-मंथन द्वारा अपने जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन लाकर प्रेम, भाईचारे, समानता और मानव सेवा के संदेश को समाज में फैलाएँ।
इससे पूर्व यहां के मुखी श्री एन0 के0 गुप्ता जी ने श्री कुरील जी का जोनल इंचार्ज, संयोजक और मुखियों का स्वागत व धन्यवाद किया । इस समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने सतगुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

