Thursday, March 5, 2026
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*पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई का हश्र भी चौ बीरेंद्र सिंह और बृजेन्द्र सिंह जैसा हुआ!*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई का हश्र भी चौ बीरेंद्र सिंह और बृजेन्द्र सिंह जैसा हुआ!*
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चंडीगढ़ ;- हरियाणा भाजपा की राजनीति में साबित हो गया कि भाजपा अपने कैडर बेस कार्य करता को ही आगे करती है और महत्वपूर्ण पद सौंपती है। यूं तो कई बार ऐसे मौके आए हैं जब भाजपा ने कूटनीति अपनाते हुए दूसरों दलों से आए नेताओं को लोकसभा की टिकट दी है और राज्यसभा का सदस्य भी बनाया है। यह कह सकते हैं कि भाजपा के लिए वह समय की जरूरत थी। अगर ऐसा ना होता तो भाजपा आज राज्यसभा के लिए कुलदीप बिश्नोई या किरण चौधरी में से किसी को भी राज्यसभा का उम्मीदवार बनाती, पर ऐसा नहीं हुआ क्योंकि अभी हरियाणा में चुनाव बहुत दूर है। माना जा रहा है कुलदीप बिश्नोई और किरण चौधरी का हश्र भी चौधरी वीरेंद्र सिंह जैसा हुआ है! भाजपा के बारे मे राजनेताओं की सोच है यह पार्टी पहले नेताओं को आकर्षित करती है फिर उनका राजनीतिक वजन तोलती है उनमें वोटो का वजन कितना है। यदि भाजपा को लगता है कि यह नेता अब आधारहीन होता जा रहा है तो वह उससे किनारा करने लग जाती है। यदि लगता है कि यह नेता पावरफुल है और उसके वोट बैंक है साथ- साथ इसके पास विधायक बनाने की क्षमता है, तो भाजपा उनकी अच्छी बुरी बात भी हंसते-हंसते सह जाती है। इस बात की मिसाल है हरियाणा के नेता राव इंद्रजीत सिंह। वह अहीर क्षेत्र में बड़ा चेहरा माने जाते हैं उनके नाम से ही दक्षिण हरियाणा में एमएलए बनते हैं। कई मौकों पर राव इंद्रजीत ने खुलकर भाजपा और सरकार की आलोचना भी की है परंतु अवसरवादी भाजपा ने राव को आजतक किसी भी तरह का नोटिस नहीं दिया है। भाजपा के बारे में कहावत है अपना आधार बढ़ाने के लिए बाहरी नेताओं को बड़े आदर के साथ पार्टी में लाते हैं। उपयोग करने के बाद नेता को हाशिये पर धकेल देते हैं। इसका उदाहरण भाजपा में रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह और उनके बेटे बृजेंद्र सिंह खुले मंचो से देते है। अब यही हश्र कुलदीप बिश्नोई का होने जा रहा है उसने राज्यसभा की टिकट पाने के लिए कई बार दिल्ली दौरा किया। बड़े नेताओं से मुलाकात की परंतु भाजपा ने अपने कोर कैडर के नेता संजय भाटिया को राज्यसभा की टिकट सौंपी। कुलदीप बिश्नोई तथा किरण चौधरी हाथ मलते रह गए। अब देखते हैं भविष्य में कुलदीप बिश्नोई और किरण चौधरी की राजनीति किस तरफ करवट लेती हैं।

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