Wednesday, September 16, 2026
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हरियाणा विधानसभा सत्र की पहले दिन की कार्यवाही / राज्यपाल ने गिनाई सैनी सरकार की उपलब्धियां*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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हरियाणा विधानसभा सत्र की पहले दिन की कार्यवाही / राज्यपाल ने गिनाई सैनी सरकार की उपलब्धियां*
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हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण ने साफ संकेत दिया कि नायब सरकार की प्राथमिकताओं में अब आधी आबादी है। ‘लाडो लक्ष्मी’ के तहत ₹2,100 मासिक सहायता से लेकर ‘ड्रोन दीदी’ जैसी तकनीकी पहल तक, महिलाओं की आर्थिक मजबूती का व्यापक खाका पेश किया गया। सुरक्षा के मोर्चे पर सात नए महिला थाने खोलने और पंचायत से शहरी निकायों तक 50 प्रतिशत नेतृत्व भागीदारी पर जोर दोहराया गया। स्वयं सहायता समूहों के विस्तार और लाखों महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाने के दावों के बीच संकेत यह भी हैं कि आगामी बजट में इस पैकेज को और विस्तार मिल सकता है। शुक्रवार को राज्यपाल प्रो़ असीम कुमार घोष के अभिभाषण से बजट सत्र की शुरूआत हुई।
महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, रोजगार, उद्यमिता, स्कॉलरशिप और सामाजिक सुरक्षा सहित लगभग हर सेक्टर में महिलाओं के लिए योजनाओं का व्यापक खाका पेश किया गया। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘मिशन–महिला 2029’ की रणनीतिक शुरुआत माना जा रहा है। राज्यपाल ने कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब उसकी महिलाएं सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर हों। अभिभाषण की हर परत में यही सोच झलकती रही।
प्रदेश में 33 महिला पुलिस थाने और 239 महिला हेल्प डेस्क सक्रिय हैं। अब लोहारू, बरवाला, नरवाना, समालखा, महम, रादौर और पिहोवा में 7 नए महिला थाने खोले जाएंगे। फास्ट–ट्रैक अदालतों की संख्या बढ़ाई गई है, ताकि महिला संबंधित मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सके। तकनीकी निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के चलते गंभीर अपराधों में कमी का दावा किया गया।
वर्ष 2025 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 16 प्रतिशत कमी और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के खिलाफ अपराधों में चार वर्षों में 67 प्रतिशत गिरावट का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया। महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम की अनुमति और पुलिस बल में उनकी बढ़ती भागीदारी को भी अभिभाषण की प्रमुख उपलब्धि बताया गया।
अभिभाषण की सबसे चर्चित योजना रही ‘लाडो लक्ष्मी योजना’। 23 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को हर महीने ₹2,100 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 9 लाख 22 हजार 452 महिलाओं को 4 किस्तों में 634 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। सरकार ने दायरा बढ़ाते हुए 1.80 लाख रुपये वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। शर्त यह कि महिला अपने बच्चों की शिक्षा और पोषण को प्राथमिकता दे। इसे परिवार में महिला की केंद्रीय भूमिका को मजबूत करने की दिशा में कदम बताया गया।
‘ड्रोन दीदी योजना’ ने अभिभाषण में खास आकर्षण पैदा किया। ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन पायलट और तकनीकी विशेषज्ञ बनाने के लिए सरकारी कंपनी – ड्रोन इमेजिंग एंड इंफॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ हरियाणा लिमिटेड का गठन किया गया है। अब तक 33 महिलाएं प्रशिक्षित हो चुकी हैं, 15 प्रशिक्षण में हैं और लक्ष्य 1,350 महिलाओं को प्रशिक्षित करने का है। कृषि सर्वेक्षण, मैपिंग और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में यह पहल ग्रामीण महिला शक्ति को तकनीकी युग से जोड़ने का प्रयास है। स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) मॉडल को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया गया है। प्रदेश में 1 लाख से अधिक महिला एसएचजी सक्रिय हैं। 124 अटल श्रमिक–किसान कैंटीन महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं। ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के तहत 1 लाख 6 हजार 325 महिलाएं सालाना एक लाख रुपये से अधिक आय अर्जित करने लगी हैं। सांझा बाजार और बस अड्डों पर एसएचजी उत्पादों के लिए विशेष दुकानों से महिलाओं को सीधा बाजार मिला है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए ‘मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना’ के तहत ₹71,000 की सहायता दी जा रही है। साथ ही, कल्पना चावला स्कॉलरशिप के तहत 250 छात्राओं को हर वर्ष एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति और विज्ञान रत्न अवॉर्ड में 5 लाख रुपये तक का पुरस्कार दिया जा रहा है। ‘सुपर 100’ योजना के तहत 144 छात्राओं ने आईआईटी, जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण ने हजारों महिलाओं को सरपंच, पार्षद और जिला परिषद सदस्य के रूप में नेतृत्व दिया है। ‘महिला अधिकारिता कानून 2021’ के तहत संपत्ति, शिक्षा और व्यवसाय में कानूनी संरक्षण का दावा किया गया। हरियाणा देश में सर्वाधिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने वाले राज्यों में शामिल है। वृद्धावस्था पेंशन ₹3,200 प्रति माह तक बढ़ाई गई है। कुल 36 लाख से अधिक लाभार्थियों में बड़ी संख्या महिलाओं की है। एनीमिया नियंत्रण अभियान और मातृ–शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के जरिए लाखों महिलाओं को पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 1.4 करोड़ से अधिक महिला आबादी वाले हरियाणा में यह पैकेज सिर्फ सामाजिक नीति नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति भी है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 33 प्रतिशत महिला आरक्षण कानून पारित किए जाने और 2029 से लागू करने के फैसले के बाद राज्य की राजनीति में महिला भागीदारी बढ़ने के संकेत स्पष्ट हैं। ऐसे में महिला मतदाताओं के बीच भरोसा मजबूत करना और उन्हें योजनाओं के जरिए सीधे जोड़ना सरकार की प्राथमिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राज्यपाल के शब्दों में, हरियाणा ‘सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन’ के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। सुरक्षा ढांचे के विस्तार से लेकर आर्थिक सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, स्कॉलरशिप और नेतृत्व के अवसर, अभिभाषण ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति और विकास की धुरी बनेंगी। बजट सत्र का यह भाषण संकेत देता है कि हरियाणा की सियासत और विकास की धुरी अब महिला शक्ति के इर्द-गिर्द घूमने वाली है।

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