Friday, January 9, 2026
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चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर चरम सीमा पर पहुंची सियासी सरगर्मी / भाजपा की राह हुई आसान*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर चरम सीमा पर पहुंची सियासी सरगर्मी / भाजपा की राह हुई आसान*
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चंडीगढ़ ;- मेयर चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। आम आदमी पार्टी के दो पार्षदों पूनम और सुमन के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद निगम का पूरा समीकरण बदल गया है। अब भाजपा के पास कुल 18 वोट हो गए हैं, जिससे मेयर चुनाव में भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है। इसी बीच भाजपा हाईकमान ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज कर दिया है। मेयर चुनाव को नजदीक आता देख भाजपा प्रदेश इकाई फ्रंटफुट पर आ चुकी है। प्रदेशाध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा ने पार्टी हाईकमान के समक्ष मेयर चुनाव को लेकर पार्टी के 6 पार्षदों के नाम सामने रखे हैं। इन 6 पार्षदों को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का कैंडिडेट बनाने को लेकर मंथन करने में जुट गई है। इन पार्षदों को पार्टी अपने स्तर पर कई मापदंडों पर मूल्यांकन करने में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा से पार्षद सौरभ जोशी, महेशइंद्र सिंह सिद्धू, कंवरजीत सिंह राणा, दिलिप शर्मा के साथ-साथ कुलजीत सिंह संधू और राजिंदर कुमार शर्मा के नाम पार्टी हाईकमान के पास भेजे गए हैं। इन छह नामों में से ही तीन प्रमुख पदों के लिए उम्मीदवार तय किए जाने हैं। पार्टी नेतृत्व हर पार्षद की राजनीतिक समझ, संगठनात्मक भूमिका और निगम में अब तक के प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन कर रहा है। वहीं दूसरी ओर आप और कांग्रेस के बीच बढ़ती खींचतान ने दोनों दलों के संभावित गठबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौजूदा स्थिति में आप के पास 11 वोट हैं, जबकि कांग्रेस के पास 6 वोट हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का एक वोट भी है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा के 18 वोटों के मुकाबले विपक्षी खेमे की स्थिति कमजोर नजर आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आप-कांग्रेस के बीच समन्वय नहीं बन पाया तो मेयर चुनाव में भाजपा की राह और आसान हो जाएगी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष जतिंद्र पाल मल्होत्रा और पार्टी हाईकमान केवल संख्या बल के आधार पर ही नहीं, बल्कि पार्षदों की व्यक्तिगत छवि और कार्यशैली को भी ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहता है। पार्टी नहीं चाहती कि निगम के शीर्ष पदों पर ऐसे चेहरे आएं, जो संगठनात्मक अनुशासन या आपसी तालमेल के लिहाज से कमजोर साबित हों। इसी कारण हर नाम को अलग-अलग मापदंडों पर परखा जा रहा है। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि जिन पार्षदों के नाम शॉर्टलिस्ट किए गए हैं, उनके बीच अन्य पार्षदों के साथ तालमेल, संगठन के लिए अब तक निभाए गए दायित्व, पार्टी कार्यक्रमों और आंदोलनों में सक्रिय भूमिका, बीता राजनीतिक करियर और पार्टी की छवि को मजबूत करने में योगदान जैसे पहलुओं का विस्तृत आंकलन किया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कौन सा पार्षद भाजपा के एजेंडे और नीतियों को शहर के सामने प्रभावी ढंग से रख सकता है। यह मेयर चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि दिसंबर 2026 में निगम के आम चुनाव होने तय है, ऐसे में निगम में सत्ता हासिल करने के लिए मेयर का चेहरा काफी अहम माना जा रहा है।

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