देश के मुख्य न्यायाधीश ने नए वकीलो को बताए सफलता के गुर / कहा कानूनी पेशे में शॉर्टकट से नही मिलती सफलता*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज /भारतीय न्यूज,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
देश के मुख्य न्यायाधीश ने नए वकीलो को बताए सफलता के गुर / कहा कानूनी पेशे में शॉर्टकट से नही मिलती सफलता*
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सोनीपत ;- भारत के मुख्यं न्यायाधीश सूर्यकांत ने नए वकीलों को एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में उन्हीं लोगों को इनाम मिलता है, जो इसे सफलता का शॉर्टकट नहीं, बल्कि एक ऐसी कला मानते हैं, जिसे सावधानीपूर्वक सीखकर ईमानदारी के साथ अभ्यास करना होता है। उन्होंने कहा कि कानून कोई तेज दौड़ नहीं बल्कि एक लंबी और सोच-समझकर तय की जाने वाली यात्रा है। सोनीपत के डॉ. बी.आर. आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में नए वकीलों को संबोधित कर रहे सीजेआई ने उन्हें भविष्य को लेकर भी नसीहत दी। उन्होंने कहा, “युवा वकील ऐसे समय में इस पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, जब इसकी प्रासंगिकता पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन तकनीकी बदलाव, आर्थिक जटिलताओं, अधिकारों के बढ़ते विमर्श और कड़ी सार्वजनिक निगरानी के कारण इस पेशे की अपेक्षाएं काफी अधिक हैं। इसलिए वकीलों से केवल प्रभावी ढंग से बहस करने की ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ सलाह देने की भी अपेक्षा की जाती है।
सीजेआई ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “इस पेशे में युवाओं से केवल अपने आपको ढालने के लिए नहीं, बल्कि अपने मानकों को भी ऊंचा रखने की उम्मीद की जाती है। आपसे अपेक्षा की जाती है कि जहां आपका विश्वास कमजोर पड़ रहा हो, वहां उसे बहाल करें, सिद्धांतों को नुकसान पहुंचाए बिना नया दृष्टिकोण अपनाएँ और क्षमता तथा अंतरात्मा दोनों के साथ कानून का अभ्यास करें।”
सीजेआई ने समझाया कि यह अपेक्षा कोई बोझ नहीं है, बल्कि लोगों का आप पर जताया गया विश्वास ही होता है। उन्होंने कहा, “कानून उन लोगों को पुरस्कृत करता है जो इसे सफलता का शॉर्टकट नहीं, बल्कि एक ऐसी कला मानते हैं जिसे सावधानीपूर्वक सीखकर ईमानदारी के साथ अभ्यास करना होता है। कानून कोई तेज दौड़ नहीं है। यह एक लंबी, सोच-समझकर तय की जाने वाली यात्रा है। जो लोग प्रतिबद्ध, जिज्ञासु और ईमानदार बने रहते हैं, वे अक्सर पाते हैं कि यह पेशा उन्हें पुरस्कृत करता है।”

