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*नेता प्रतिपक्ष भूपेंद् हुड्डा ने जताई बिजली विभाग के निजीकरण पर कड़ी आपत्ति / सरकार के 12 साल पूरे होने पर तथ्यो के साथ पेश किया बीजेपी की नाकामियों का लेखा-जोखा*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*नेता प्रतिपक्ष भूपेंद् हुड्डा ने जताई बिजली विभाग के निजीकरण पर कड़ी आपत्ति / सरकार के 12 साल पूरे होने पर तथ्यो के साथ पेश किया बीजेपी की नाकामियों का लेखा-जोखा*
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दिल्ली/चंडीगढ़ ;- पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बिजली विभाग के निजीकरण पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी सरकार निजी कंपनियों के लिए काम कर रही। बिजली विभाग के निजीकरण से जनता पर महंगाई की और मार पड़ेगी और किसानों व गरीबों को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
हुड्डा बीजेपी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली आवास पर विशेष पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने तथ्यों और आंकड़ों के साथ सरकार की नाकामियों का लेखा-जोखा पेश किया।
सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जैसे राजस्व जिलों की बिजली वितरण के लिए पैरेलल लाइसेंस देना निजीकरण की दिशा में घातक कदम साबित होगा। बिजली कर्मियों के साथ कांग्रेस भी इसका पुरजोर विरोध करती है।
सरकार द्वारा बड़ी साजिश के तहत कृषि उपभोक्ताओं के लिए एग्री डिस्कॉम को अलग किया जा रहा है। ताकि प्राईवेट कंपनी को किसानों के हिस्से की बिजली आपूर्ति हो और किसानों को मिलने वाली सब्सिडी धीरे-धीरे खत्म हो जाए। कांग्रेस ने अपने कार्यकाल 10 पैसे प्रति यूनिट दी गयी थी। उसको भी खत्म करने की साज़िश है।
वैसे भी डीएचबीवीएन के कुल राजस्व का लगभग एक-तिहाई राजस्व गुरुग्राम से ही प्राप्त होता है। इस क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने के बाद राजस्व का भारी नुकसान होगा, जो निगम के आर्थिक स्थिति को बिगाड़ने का काम करेगा। खतरा इस बात का भी है कि प्राइवेट कंपनियां सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने की बजाए, औद्योगिक क्षेत्र, मॉल, कामर्शियल और शहरी क्षेत्रों के पास इलाकों में ही बिजली आपूर्ति करेंगी व घरेलू ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों व गरीब उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति नहीं करेंगी।
यहां बिजली आपूर्ति का काम डीएचबीवीएन के पास ही रहेगा, जोकि बिना राजस्व के संभव नहीं होगा। यानी एक बड़ी आबादी ऊर्जा संकट में फंस सकती है।
इतना ही नहीं, प्राइवेट कंपनी के लिए बिजली आपूर्ति सिर्फ एक व्यापार है और वो सिर्फ मुनाफे के लिए कारोबार करेगी। इससे बड़ी आबादी तक बिजली आपूर्ती ही नहीं, बिजली कर्मचारियों और इंजीनियर की सेवाएं भी प्रभावित होगी और बड़ी तादाद में कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक जाएगी। आगे भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार के दावों और उनकी हकीकत का जिक्र करते हुए निवेश के आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि सरकार बार-बार नया निवेश लाने जो दावे करती है, उसकी भी पोल खुल चुकी है। 2016 में गुरुग्राम के अंदर जो इन्वेस्टर्स समिट करवाई गई थी, उसमें दावा किया गया था कि 5 लाख 84 हजार करोड़ के 359 एमओयू साइन हुए हैं। लेकिन उसमें से मात्र मात्र 20,300 करोड़ का ही निवेश का दावा किया है सरकार ने, जो कि दावे के मुकाबले सिर्फ 3.4 प्रतिशत है। किसानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज पूरे प्रदेश में किसानों की फसल औने-पौने दामों में खरीदी जा रही है। सरकारी खरीद न होने के कारण उन्हें अपना धान MSP से ₹400 प्रति क्विंटल और बाजरा MSP से ₹800-900 प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। मूंग की MSP 8,780 रुपये है, फिर भी खरीद न होने से किसानों को प्रति क्विंटल 1,500 से 1,600 रुपये तक का घाटा हो रहा है।
2024 के चुनाव में बीजेपी ने धान का ₹3,100 प्रति क्विंटल रेट देने का वादा करके सत्ता में आई थी, लेकिन आज किसानों को MSP पर फसल बेचने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। ये वही बीजेपी है जिसने किसानों की आय दोगुनी करने का दावा किया था, लेकिन आय बढ़ाने की बजाए, सरकार ने लागत कई गुना बढ़ा दी। कांग्रेस सरकार के दौरान 2005 से 2014 तक धान और गेहूं के MSP में हर बार 14-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती थी, जबकि भाजपा सरकार में यह बढ़ोतरी मात्र 5-6 प्रतिशत तक सीमित रह गई है।
एमएसपी ही नहीं, सरकार किसानों को खाद के लिए भी तरसा रही है। हरियाणा के लिए अक्टूबर में यूरिया का आवंटित स्टॉक 3.50 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन प्रदेश सरकार ने अब तक सिर्फ 67,000 मीट्रिक टन ही उठाया है। DAP का आवंटित स्टॉक डेढ़ लाख मीट्रिक टन है, जबकि उठाया गया सिर्फ 38,000 मीट्रिक टन है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीजेपी के चुनावी वादों की पोल खोलते हुए बताया कि ये सरकार अपने किसी भी कार्यकाल का कोई भी वादा पूरा नहीं कर पाई। इसबार महिलाओं को ₹2,100 देने का जो वादा था, वो भी अधूरा रह गया है। बीजेपी खुद इस वादे से मुकर चुकी है और 50 तरह की शर्तें लगाकर ज्यादातर महिलाओं को योजना के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
भर्तियों के मामले में भी स्थिति खराब है। सत्ता में बैठे लोगों ने 2 लाख भर्तियाँ करने का वादा किया था, लेकिन दो साल में HSSC की एक भी भर्ती नहीं निकली। CET तक नहीं हो रहा और आज भी सरकारी विभागों में 2 लाख पद खाली पड़े हैं। बेरोज़गार युवा प्रदेश और देश छोड़कर पलायन कर रहे हैं। CMIE के 2024 के आँकड़ों के मुताबिक हरियाणा में युवा बेरोज़गारी दर करीब 37 प्रतिशत है, जो देश में सबसे ज्यादा बताई जाती है।
कौशल कर्मियों को पक्का करने का वादा भी पूरा नहीं हुआ और मुख्यमंत्री ने पिछले विधानसभा सत्र में कहा कि यह कच्ची व्यवस्था है।
2014 में जब कांग्रेस ने सरकार छोड़ी थी तो हरियाणा प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति निवेश, रोजगार, खिलाड़ियों और बुजुर्गों को सम्मान देने, किसानों को MSP देने, खुशहाली और कानून-व्यवस्था के मामले में देश का नंबर वन राज्य माना जाता था। आज हरियाणा बेरोज़गारी, नशे, अपराध और कर्ज़ के मामले में आगे बताया जा रहा है। 18 बड़े राज्यों में हरियाणा 14वें स्थान पर फिसल गया है। हरियाणा बनने से लेकर 2014 तक प्रदेश पर करीब ₹70 हजार करोड़ का कर्ज़ था, जो बीजेपी सरकार में बढ़कर साढ़े पाँच लाख करोड़ रुपये हो गया है। हुड्डा ने बताया कि इस सरकार के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज की गई। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी NIRF रैंकिंग में हरियाणा की किसी यूनिवर्सिटी ने टॉप 100 में जगह नहीं पाई।
India Justice Report के अनुसार पिछले 5 साल में हरियाणा पुलिस की रैंकिंग 8वें स्थान से खिसककर 14वें स्थान पर पहुँच गई है। State on Performance-based Indicator में हरियाणा 11वें स्थान पर है।
नीति आयोग की SDG रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार हरियाणा पूरे देश में 14वें नंबर पर है। NCRB की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 3 साल में भ्रष्टाचार के 187 प्रतिशत मामले बढ़े हैं और हरियाणा भ्रष्टाचार में 6वें नंबर पर पहुँच गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार किसानों पर कर्ज़ के मामले में हरियाणा देश में चौथे स्थान पर है और औसतन हर परिवार पर ₹1,82,922 का कर्ज़ है। नीति आयोग की Export Preparedness Index 2024 रिपोर्ट में हरियाणा समग्र रैंकिंग में गिरकर 10वें स्थान पर पहुँच गया है, जबकि 2021 में यह 5वें स्थान पर था। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 2018-19 से अब तक हरियाणा में 1,446 फैक्ट्रियाँ या तो बंद हो गईं या पलायन कर गईं। पिछले 5 सालों में औद्योगिक क्षेत्र में 12.2 प्रतिशत की गिरावट आई है।

आज प्रदेश में अपराध चरम पर बताया जाता है और केंद्र सरकार के सामाजिक प्रगति सूचकांक ने हरियाणा को देश का सबसे असुरक्षित राज्य घोषित किया है। यहाँ 60 से ज्यादा आपराधिक गैंग सक्रिय हैं और लूट, डकैती, फिरौती, फायरिंग तथा मर्डर रोजमर्रा के अपराध बन गए हैं।

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