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ज्ञानेश का इस्तीफा नहीं तो बढ़ेगा सियासी तूफान! मोदी सरकार पर भी बढ़ सकता है दबाव!*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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ज्ञानेश का इस्तीफा नहीं तो बढ़ सकता है सियासी तूफान! मोदी सरकार पर भी बढ़ा दबाव!*
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नई दिल्ली ;- देश के चुनावी तंत्र को लेकर चल रहा विवाद अब सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इर्द-गिर्द केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने CEC के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए राजनीतिक रूप से असहज चुनौती बन सकता है।
*14 आपत्तियों ने बढ़ाई हलचल*
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने लगभग 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने पुनर्बहाली तथा SIR और चुनावी डेटाबेस से जुड़े फैसलों का उल्लेख किया गया है। यही रिपोर्ट अब राजनीतिक विवाद का प्रमुख आधार बन गई है।
*विपक्ष का सीधा निशाना, CEC दे इस्तीफा*
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी उनके इस्तीफे की मांग दोहराई है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। लेकिन चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज किया
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़े आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी हुए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों के बीच लिखित टिप्पणियां और अलग-अलग विचार आंतरिक deliberative प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं।
*इस्तीफे का कथित फर्जी पत्र भी वायरल*
विवाद के बीच 27 सितंबर को ज्ञानेश कुमार के नाम से कथित इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। चुनाव आयोग ने इसे फर्जी करार दिया। यानी फिलहाल CEC के इस्तीफे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
*सबसे बड़ा सवाल—आगे क्या?*
अब राजनीतिक निगाहें इस बात पर हैं कि विवाद को शांत करने के लिए आगे क्या कदम उठते हैं। यदि विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ता है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर बहस लंबी खिंचती है, तो केंद्र सरकार को भी इस मुद्दे पर लगातार राजनीतिक जवाब देना पड़ सकता है।
हालांकि, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा न देने से मोदी सरकार के लिए संवैधानिक संकट निश्चित रूप से खड़ा होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि CEC को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ रहा है और चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता पर पूरे देश मे बहस तेज हो गई है।

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