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*धरे जाएंगे फर्जी वकील और फर्जी लॉ डिग्री होल्डर / CBI जांच की मांग / सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*धरे जाएंगे फर्जी वकील और फर्जी लॉ डिग्री होल्डर / CBI जांच की मांग / सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस*
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दिल्ली/चंडीगढ़ ;- सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी वकीलों, फर्जी लॉ डिग्री और कानूनी पेशे में गिरते पेशेवर मानकों की जांच CBI से कराने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को नोटिस जारी किया।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), बार काउंसिल ऑफ इंडिया और CBI को नोटिस जारी किया। याचिका अधिवक्ता राजा चौधरी ने दायर की है।
याचिका में फर्जी वकीलों, फर्जी लॉ डिग्री, दूसरे व्यक्ति के नाम पर वकालत करने और कानूनी पेशे में गिरते मानकों से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच, अधिमानतः CBI या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के Mohammad Kafeel v. State of U.P. फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कानूनी पेशे के अपराधीकरण और फर्जी वकीलों की समस्या पर चर्चा की गई थी।
याचिका में हाल में CJI की कोर्ट में हुई टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए “Cockroach Janta Party” नामक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान से जुड़ी गतिविधियों की जांच की भी मांग की गई है। याचिका के मुताबिक कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों को संदर्भ से काटकर सोशल मीडिया पर मीम्स, वायरल कंटेंट और व्यावसायिक सामग्री के रूप में प्रसारित किया गया। इसके बाद “Cockroach Janta Party” नाम से सोशल मीडिया अभियान सामने आया और कुछ ट्रेडमार्क आवेदन भी दाखिल किए गए। याचिकाकर्ता का कहना है कि याचिका का उद्देश्य न्यायपालिका की वैध आलोचना, असहमति या व्यंग्य को रोकना नहीं है। आपत्ति कथित तौर पर कोर्ट की कार्यवाही और मौखिक टिप्पणियों के संगठित व्यावसायिक इस्तेमाल, ट्रेडमार्क कमर्शियलाइजेशन और monetisation को लेकर है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट की कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियां अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं होतीं और उन्हें संदर्भ से अलग करके व्यावसायिक संपत्ति, राजनीतिक ब्रांडिंग या monetised digital content में बदलना न्यायिक संस्थानों की गरिमा और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकता है।
याचिका में BCI चेयरपर्सन के उस बयान का भी हवाला दिया गया है जिसमें करीब 35-40% वकीलों के फर्जी होने की बात कही गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अब संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
(साभार ;- लाइव ला)

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