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गृहमंत्री शाह की मॉनसून सत्र से पहले संसद में NDA की ताकत बढ़ाने की कवायद शुरू!*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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गृहमंत्री शाह की मॉनसून सत्र से पहले संसद में NDA की ताकत बढ़ाने की कवायद शुरू!*
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केंद्र सरकार मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक लाना चाहती है। इनमें नारी वंदन संशोधन अधिनियम और परिसीमन विधेयक शामिल हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब नंबर को लेकर केंद्र सरकार आश्वस्त हो। अलग-अलग राज्यों में चल रही सियासी चहलकदमी का केंद्र अब दिल्ली शिफ्ट होता नजर आ रहा है। 20 जुलाई को शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का ऐक्शन मोड में आना कई बड़े सियासी घटनाक्रम का संकेत दे रहा है। मंगलवार को दिल्ली में अमित शाह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात हुई थी। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी उनसे मिले। महाराष्ट्र की सियासत में काफी महत्वपूर्ण किरदार बनकर उभरे उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की मुलाकात भी गृहमंत्री से हुई। इन मुलाकातों का भले ही अलग-अलग एजेंडा रहा हो, लेकिन एक साझा बिंदु स्पष्ट था कि आने वाले दिनों में बड़े बदलावों और चुनौतियों के लिए राज्य और केंद्र की तैयारियां एक लाइन पर होना चाहिए।
केंद्र सरकार सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक लाना चाहती है। इनमें नारी वंदन संशोधन अधिनियम और परिसीमन विधेयक शामिल हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब नंबर को लेकर केंद्र सरकार आश्वस्त हो। केंद्रीय स्तर पर मंत्रिमंडल में बदलाव या विस्तार के साथ भाजपा की नई केंद्रीय टीम का गठन भी लंबित है। इन सभी एजेंडा पर आगे बढ़ने के लिए अलग-अलग स्तरों पर कई बैठकों का दौर पूरा हो चुका है।सूत्रों ने कहा कि केंद्र के सामने सबसे बड़ा एजेंडा फिलहाल लोकसभा और संसद में एनडीए की ताकत बढ़ाना है। तृणमूल का बड़ा धड़ा एनडीए के साथ आया है। शिवसेना उद्धव गुट के छह सांसद टूटकर एकनाथ शिंदे के साथ आए हैं और माना जा रहा है कि अब वे एनडीए के साथी होंगे। महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी को लेकर भी तरह-तरह की अटकलें हैं। पवार गुट के कई नेता एनडीए के साथ आने की इच्छा जता रहे हैं। केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि संसद में भाजपा और एनडीए की संख्या लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि इस नए समीकरण के सहारे वह अपने कई प्रमुख एजेंडों को सफलता पूर्वक आगे बढ़ाने में सक्षम हो। हालांकि, अभी भी संवैधानिक बदलाव के लिए जरूरी संख्या बल पूरा नहीं हुआ है। सूत्रों ने कहा कि शाह सभी प्रमुख राजनीतिक एजेंडों के मद्देनजर लगातार बैठकें कर रहे हैं। इसके अलावा अलग-अलग स्तरों पर भी कई अन्य बैठकें पर्दे के पीछे हो रही हैं।
*योगी की मुलाकात के क्या मायने?*
योगी की मुलाकात पर सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव मोदी सरकार के लिए बहुत अहम है। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान खोई जमीन को वापस लाने की चुनौती पार्टी और सरकार के सामने है। अभी प्रदेश में नई टीम बनी है। इस टीम को भी जिम्मेदारी देकर सक्रियता बढ़ानी है। आने वाले दिनों में प्रदेश में चुनावी कवायद काफी तेज होगी। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि प्रदेश का सही जमीनी फीडबैक सामने रखकर एक टीम के रूप में चुनाव लड़ा जाए। प्रदेश में मतभेद दूर करना केंद्र की प्राथमिकता है। जिसकी कवायद नितिन नवीन के यूपी दौरे के वक्त नजर आई थी। इसके अलावा सरकार विपक्ष द्वारा उठाये जाने वाले संभावित मुद्दों से निपटने की भी तैयारी कर रही है। सरकार को पता है कि संसद सत्र के दौरान विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण के मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगा। स्वयं प्रधानमंत्री की निगाह पूरे मामले पर है। मामला कोर्ट में भी है। केंद्र इस मामले में बहुत साधे हुए तरीके से आगे बढ़ना चाहता है। इस संबंध में भी मुख्यमंत्री से फीडबैक लिया गया है। केंद्र ने अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी हासिल की है। सूत्रों ने यह भी दावा किया कि उत्तरप्रदेश में कई अन्य दलों के नेता भाजपा नेतृत्व के संपर्क में बताए जा रहे हैं उनको लेकर भी केंद्रीय स्तर पर फीडबैक लिया जा रहा है।

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