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हरियाणा के स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा दिखी संगठित तो कांग्रेस में एकता का आभाव!*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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हरियाणा के स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा दिखी संगठित तो कांग्रेस में एकता का आभाव!*
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चंडीगढ़ ;- हरियाणा में होने जा रहे निकाय चुनाव इस बार सिर्फ स्थानीय मुद्दों व विकास की राजनीति तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह मुकाबला जातीय समीकरणों, संगठनात्मक मजबूती और उम्मीदवार चयन की सूक्ष्म रणनीति के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। भाजपा ने अपने उम्मीदवारों को चुनते हुए न सिर्फ सामाजिक गणित को ध्यान में रखा है, बल्कि पार्टी का सुख-दुख में साथ देने वाले पुराने नेताओं पर भरोसा जताया है।
पंचकूला में जहां वैश्य समुदाय के करीब 44 हजार वोट, पंजाबी समुदाय के लगभग 55 हजार वोट और ब्राह्मण वर्ग के करीब 13 हजार मतदाता हैं, वहां भाजपा ने पुराने साथी श्यामलाल बंसल को उतारकर सबके बीच स्वीकार्यता बनाने की कोशिश की है।
सोनीपत में भाजपा ने एक बार फिर अनुभव और जीत की संभावना को प्राथमिकता दी है। यहां राजीव जैन को मैदान में उतारना इस बात का संकेत है कि पार्टी ऐसे उम्मीदवारों पर भरोसा कर रही है जिनकी स्थानीय पकड़ मजबूत है और जिनका पिछला प्रदर्शन भी स्पष्ट बढ़त देता है। पिछली बार की बड़ी जीत, जिसमें उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को भारी अंतर से हराया था, यह बताती है कि भाजपा इस सीट पर निरंतरता और स्थिर वोट बैंक की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि यहां पंजाबी वोट वैश्य वोटों के मुकाबले पांच गुना ज्यादा है। इसके बावजूद जैन को टिकट देकर पार्टी ने स्थानीय पकड़ को तवज्जो दी है।
अंबाला में युवा महिला उम्मीदवार को टिकट देकर भाजपा ने एक अलग संदेश देने की कोशिश की है। यह कदम केवल जातीय या सामाजिक संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा भी है।
भाजपा उम्मीदवार अक्षिता सैनी अपने दादा की विरासत को आगे बढ़ाने जा रही है। उनके दादा 1962 से जनसंघ से थानेसर से विधानसभा से चुनाव लड़ा था। कुल मिलाकर भाजपा का फोकस स्पष्ट रूप से जिताऊ उम्मीदवार, सोशल बैलेंस व संगठनात्मक के मॉडल पर है।
*कांग्रेस में दिखी अंदरूनी खींचतान जारी*
इसके विपरीत कांग्रेस की रणनीति अधिक जटिल और कहीं-कहीं असंगठित नजर आती है। पार्टी ने जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश जरूर की है, लेकिन टिकट बंटवारे में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी का असर साफ दिखता है। पंचकूला में इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण सामने आता है।
पंचकूला में सैलजा के करीबी चंद्रमोहन के कहने पर टिकट दी गई है, जबकि अंबाला व सोनीपत में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबियों को टिकट दिया गया है। हालांकि पार्टी ने सोनीपत में जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए पंजाबी समुदाय को टिकट दिया है। हालांकि पिछली बार पंजाबी उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था, मगर कांग्रेस इस बार पूरी ताकत से मैदान में उतरने जा रही है। अंबाला में महिला ओबीसी सीट रिजर्व है। इसलिए स्थानीय विधायक निर्मल सिंह की पसंद को तवज्जो दी गई है।
*तीन बार विधायक का चुनाव हारे हैं बंसल*
पंचकूला नगर निगम चुनाव के लिए भाजपा ने तीन बार विधायक का चुनाव हार चुके वरिष्ठ नेता श्याम लाल बंसल को मेयर पद का प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा ने बंसल को मैदान में उतारकर न केवल अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को साधा है बल्कि शहर के व्यापारिक वर्ग को भी बड़ा संदेश दिया है।
71 वर्षीय श्याम लाल बंसल के लिए यह टिकट किसी लॉटरी से कम नहीं है। दिसंबर 2020 के निगम चुनाव में भी बंसल का नाम लगभग तय था लेकिन ऐन मौके पर वे टिकट से वंचित रह गए थे। इस बार पार्टी ने उनकी वरिष्ठता, बेदाग छवि और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए भरोसा जताया है।
बंसल वर्तमान में हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन और हरियाणा रोजगार कौशल निगम में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। श्याम लाल बंसल राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वे कांग्रेस के दिग्गज नेता चंद्रमोहन के खिलाफ तीन बार (1996, 2000 और 2005) विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें जीत हासिल नहीं हुई लेकिन हर बार उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा।

दादा की विरासत को आगे बढ़ाएगी युवा अक्षिता
नगर निगम चुनाव में भाजपा ने पुराने कार्यकर्ता स्वर्ण सैनी की बेटी अक्षिता सैनी को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। अक्षिता (32) पहली बार चुनावी मैदान में उतर रही हैं और कांग्रेस की उम्मीदवार कुलविंदर कौर को चुनौती देंगी। अक्षिता के पिता स्वर्ण सैनी ने बताया कि अक्षिता के दादा बरयम सिंह सैनी थानेसर विधानसभा सीट से जनसंघ के समय चुनाव लड़ चुके हैं। वह कांग्रेस प्रत्याशी से 50 वोटों से हार गए थे।

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