*मोदी की लोकप्रियता में गिरावट! / राहुल की चुनौती बरकरार/ भाजपा-कांग्रेस के वर्चस्व की जंग में जनता के मुद्दे बनेंगे निर्णायक?*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
*मोदी की लोकप्रियता में गिरावट!/ राहुल की चुनौती बरकरार /भाजपा-कांग्रेस के वर्चस्व की जंग में जनता के मुद्दे बनेंगे निर्णायक?*
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
नई दिल्ली ;- भारतीय राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच वर्चस्व की लड़ाई लगातार चर्चा के केंद्र में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के सामने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है—जनता के बीच लोकप्रियता के मामले में मोदी और राहुल गांधी की स्थिति क्या है? कुछ महीनों बाद 5 राज्यो में विधानसभा चुनावों की घण्टी बजने वाली है।
अगस्त 2026 में प्रकाशित इंडिया टुडे–सी-वोटर मूड ऑफ द नेशन सर्वेक्षण इस सवाल पर एक महत्वपूर्ण संकेत देता है। सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के समर्थन में अंतर दिखाई देता है, हालांकि राहुल गांधी की राजनीतिक स्वीकार्यता में पिछले कुछ वर्षों के दौरान वृद्धि भी दर्ज की गई है।
*वर्चस्व की लड़ाई के तीन बड़े पहलू*
भाजपा और मोदी: सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी को अधिक समर्थन मिला। हालांकि जनवरी 2026 के 55% से अगस्त में उनका आंकड़ा घटकर 48.7% रहा।
कांग्रेस और राहुल गांधी :-राहुल गांधी का समर्थन जनवरी के 27% से बढ़कर 27.1% हुआ। 2022 में इसी सर्वेक्षण में उनका आंकड़ा 6.8% था। यह उनके दीर्घकालीन राजनीतिक उभार का संकेत है, लेकिन इससे अपने आप कांग्रेस की चुनावी जीत सुनिश्चित नहीं होती।
जनता के मुद्दे:- बेरोजगारी, महंगाई, रोजगार परीक्षाओं और आर्थिक अवसरों को लेकर असंतोष भी राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष :-
*लोकप्रियता और चुनावी ताकत एक ही बात नहीं*
मोदी और राहुल गांधी के बीच मुकाबले को केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता से नहीं समझा जा सकता। भाजपा का संगठन, सरकार का कामकाज, सहयोगी दल और राज्यों में उसका प्रदर्शन एक तरफ हैं; दूसरी तरफ कांग्रेस की संगठनात्मक मजबूती, विपक्षी एकता, स्थानीय नेतृत्व और जनता के मुद्दों पर उसका प्रभाव है।
इसलिए फिलहाल उपलब्ध सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री पद की पसंद के सवाल पर दोनों नेताओं के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है, जबकि राहुल गांधी की बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है। वास्तविक राजनीतिक वर्चस्व का आकलन चुनाव परिणामों और अलग-अलग राज्यों के जनमत से ही अधिक व्यापक रूप से किया जा सकता है।

