Thursday, February 5, 2026
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सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का आरोप/ SIR के कारण मारे गए 107 लोग/ बंगाल विधानसभा में पारित हुआ प्रस्ताव*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का आरोप/ SIR के कारण मारे गए 107 लोग/ बंगाल विधानसभा में पारित हुआ प्रस्ताव*
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कोलकाता ;- पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर एक अहम प्रस्ताव पारित किया गया। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर फैली आशंका और मानसिक तनाव के चलते राज्य में अब तक 107 लोगों की मौत हो चुकी है। विधानसभा में पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चल रही एसआईआर प्रक्रिया ने आम लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। टीएमसी का दावा है कि बड़ी संख्या में लोगों को यह आशंका सता रही है कि यह प्रक्रिया राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का ही एक अप्रत्यक्ष रूप है, जिसके जरिए उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं और नागरिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। प्रस्ताव के अनुसार, दस्तावेजों की कमी या मतदाता सूची से नाम कटने के डर के कारण उत्पन्न मानसिक तनाव से कई लोगों की मौत हुई है, जिनमें आत्महत्या के मामले भी शामिल बताए गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार इस प्रक्रिया का इस्तेमाल बंगाल के लोगों को डराने तथा उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने के लिए कर रही है। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इन मौतों की नैतिक जिम्मेदारी आयोग और केंद्र सरकार को लेनी चाहिए।
*राजनीतिक घमासान तेज*
इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दावा है कि एसआईआर को लेकर फैले डर के कारण प्रतिदिन 3–4 लोग जान गंवा रहे हैं। उन्होंने इसे ‘पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने की कोशिश’ करार दिया। वहीं, विपक्षी दल बीजेपी ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार चुनावी लाभ के लिए जनता में भ्रम और डर फैला रही है। पार्टी ने कथित मौतों को व्यक्तिगत त्रासदियों का राजनीतिक इस्तेमाल बताया है।
*सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला*
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। इससे एक दिन पहले ममता बनर्जी ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा था कि यह कदम लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी है। बुधवार को वह सुप्रीम कोर्ट में खुद बहस करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बनीं।
*एसआईआर क्या है और विवाद क्यों?*
एसआईआर निर्वाचन आयोग की नियमित प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है। हालांकि, बंगाल में इसे लेकर आशंका जताई जा रही है कि यदि किसी व्यक्ति के पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हुए, तो उसे अवैध घोषित किया जा सकता है। असम में एनआरसी के दौरान सामने आए अनुभवों के कारण यह डर और गहरा गया है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को दुरुस्त करना है, न कि किसी की नागरिकता पर सवाल उठाना।

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