Saturday, October 17, 2026
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जांच के घेरे में एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियां / 200 करोड़ के टेंडरों में गड़बड़ी के चलते चंडीगढ़ में सीबीआई की रेड*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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जांच के घेरे में एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियां / 200 करोड़ के टेंडरों में गड़बड़ी के चलते चंडीगढ़ में सीबीआई की रेड*
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चंडीगढ़ ;- आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती के करीब 200 करोड़ रुपये सालाना के टेंडरों में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में चार ठिकानों पर छापे मारे। एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियों पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर टेंडर की पात्रता हासिल करने के आरोप हैं। टीमों ने सेक्टर-23, 38 वेस्ट और 40 के मकानों के साथ सेक्टर-34 स्थित कार्यालय में दस्तावेज खंगाले। लैपटॉप और कंप्यूटर जब्त किए गए हैं। सीबीआई ने मामले में 13 अक्तूबर 2026 को एफआईआर नंबर 26 दर्ज की थी। अब जब्त उपकरणों के डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जांच के दायरे में जहारवीर मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज, ए टू जेड मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज, नेशनल ग्रुप ऑफ सर्विसेज और किम्सी एंटरप्राइजेज हैं। हरियाणा के कृषि विभाग में संदीप मलिक पहले आउटसोर्स ड्राइवर थे। बाद में उन्होंने जहारवीर मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज शुरू की। उनकी बहन राखी मलिक की नेशनल ग्रुप ऑफ सर्विसेज और किम्सी एंटरप्राइजेज का नाम भी सामने आया है। विकास मलिक पर कंपनियों के कामकाज में सहयोग करने की बात कही गई है। कंपनियों के आपसी संबंधों और टेंडर प्रक्रिया में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। सेक्टर-34 स्थित एससीओ नंबर 218-219 के कैबिन नंबर 407/ए में डीएसपी प्रकाश की टीम ने दस्तावेजों की जांच की। डीएसपी पवित्र सिंह की टीम सेक्टर-40ए स्थित मकान नंबर 549 पहुंची और राखी मलिक से पूछताछ की। सेक्टर-38 वेस्ट स्थित मकान नंबर 5026 में विकास मलिक से बातचीत की गई, जबकि सेक्टर-23 की कोठी नंबर 3459 में संदीप मलिक से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए।
कई सरकारी संस्थानों के नाम पर अनुभव प्रमाणपत्र
शिकायत के अनुसार, कंपनियों ने अनुभव के प्रमाण के तौर पर कई सरकारी विभागों और संस्थानों के नाम वाले प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। इनमें पंसप, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारतीय खाद्य निगम के दिल्ली कार्यालय, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर-बरेली, आंध्र प्रदेश भवन दिल्ली, केंद्र सरकार के एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक का कार्यालय, सिरसा जिला सहकारी समिति, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और थापर यूनिवर्सिटी पटियाला शामिल हैं। शिकायत में इन प्रमाणपत्रों पर दर्ज काम की रकम एक करोड़ से सात करोड़ रुपये तक बताई गई है। जांच में संबंधित संस्थानों से प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता और उनमें दर्ज काम की पुष्टि करना अहम होगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि टेंडर की पात्रता तय करते समय दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ।
*सेक्टर-42 कॉलेज के टेंडर पर भी सवाल*
सेक्टर-42 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स में आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती के लिए 3,78,14,363 रुपये का टेंडर शिकायत में प्रमुखता से उठाया गया है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल पर इसके लिए 197 कंपनियों ने आवेदन किया था। शिकायत के मुताबिक, चार संबंधित कंपनियों को ही पात्र माना गया, जबकि अन्य आवेदकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। अंत में ए टू जेड मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज को काम मिला। जांच में यह देखा जाएगा कि अन्य कंपनियों को अयोग्य घोषित करने के क्या कारण थे और संबंधित कंपनियों के अनुभव प्रमाणपत्रों का सत्यापन कैसे हुआ।
*कई विभागों के टेंडर भी शिकायत में शामिल*
शिकायत में जीएमएसएच 16 में 350 आउटसोर्स नर्सों की तैनाती के 25,04,80,173 रुपये के टेंडर और उपायुक्त कार्यालय के 3,65,99,831 रुपये के टेंडर का उल्लेख है। एनआईटीटीटीआर, पीईसी, सीसीईटी, इंजीनियरिंग विभाग, बीएड कॉलेजों और मॉडल स्कूलों में मैनपावर सेवाओं से जुड़े टेंडरों की कुल रकम करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग के 1,96,91,386 रुपये और 54,04,609 रुपये के टेंडर, मॉडर्न जेल बुड़ैल के 1,61,70,585 रुपये व सरकारी कॉलेज सेक्टर-46 के करीब 85 लाख रुपये के टेंडर भी शिकायत में दर्ज हैं। इन टेंडरों में कंपनियों की पात्रता, प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता और वास्तविक कामकाज की जांच की जानी है।
*अप्रैल में सीबीआई को दी थी शिकायत*
शिक्षा विभाग ग्रुप-डी कर्मचारी यूनियन ने 2 अप्रैल 2026 को सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में शिकायत दी थी। चंडीगढ़ विजिलेंस की 4 मई 2026 की रिपोर्ट में भी आरोपों को गंभीर बताया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, मामला विजिलेंस सचिव के स्तर से आगे नहीं बढ़ा। अब सीबीआई की कार्रवाई के बाद पहले की शिकायत और विजिलेंस रिपोर्ट पर आगे कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में अनुभव प्रमाणपत्रों के सत्यापन के अलावा कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती, उपस्थिति रिकॉर्ड, बैंक खातों में वेतन भुगतान, ईपीएफओ और ईएसआईसी में जमा अंशदान तथा विभागों को भेजे गए बिलों की पड़ताल भी अहम होगी। इससे पता चल सकेगा कि अनुबंध के अनुसार काम हुआ या नहीं और रिकॉर्ड में कोई अनियमितता थी या नहीं। फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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