*जेसीबी ठेकेदार से मांगी गई थी ₹14 लाख की रिश्वत / हर महीने ₹1 लाख देने का भी आरोप / जांच के घेरे में डंपिंग ग्राउंड से जुड़े ठेकों और अधिकारियों की भूमिका!*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*जेसीबी ठेकेदार से मांगी गई थी ₹14 लाख की रिश्वत / हर महीने ₹1 लाख देने का भी आरोप / जांच के घेरे में डंपिंग ग्राउंड से जुड़े ठेकों और अधिकारियों की भूमिका!*
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चंडीगढ़ (गोयत) ;- नगर निगम के डंपिंग ग्राउंड में कचरा उठाने और सफाई के काम से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सीबीआई ने बुधवार को नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को सेक्टर-11 की मार्केट में कार के अंदर पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी के माध्यम से कचरा उठाने का काम कर रहे एक ठेकेदार से बकाया भुगतान जारी करने के एवज में 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
बताया जा रहा है कि ठेकेदार ने रिश्वत मांगे जाने की शिकायत सीबीआई से की थी। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया और बुधवार को कार्रवाई करते हुए शक्ति शर्मा को कथित तौर पर पांच लाख रुपये लेते गिरफ्तार कर लिया।
*हर महीने एक लाख रुपये देने का आरोप*
सूत्रों के अनुसार, डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी से कचरा उठाने वाले ठेकेदार का हर महीने करीब 10 लाख रुपये का बिल बनता है। आरोप है कि इस भुगतान के बदले हर महीने करीब एक लाख रुपये देने की मांग की जा रही थी। इसके अलावा बकाया भुगतान को लेकर भी कथित तौर पर 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई।
नगर निगम ने डंपिंग ग्राउंड में कचरे की खोदाई, उठान और अन्य कार्यों के लिए बड़ी संख्या में जेसीबी मशीनें लगा रखी हैं। ऐसे में इस पूरे काम पर हर महीने बड़ी रकम खर्च होती है।
*जांच के दायरे में डंपिंग ग्राउंड से जुड़े अधिकारियों की भूमिका*
सीबीआई की कार्रवाई के बाद डंपिंग ग्राउंड से जुड़े नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि रिश्वत की कथित मांग केवल एक अधिकारी तक सीमित थी या इसके पीछे निगम के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।
जांच का दायरा सेनेटरी विंग, एमओएच और इंजीनियरिंग विभाग तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अन्य अधिकारियों की संलिप्तता के संबंध में अभी अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
*टेंडर की शर्तों में बदलाव से लेकर काम सबलेट करने तक सवाल*
डंपिंग ग्राउंड में कचरा निपटाने के काम को लेकर पहले भी टेंडर प्रक्रिया और ठेकों पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया और ऐसी कंपनियों को भी काम मिला जिनके पास अपेक्षित अनुभव नहीं था।
एक अन्य गंभीर आरोप यह भी है कि कुछ कंपनियों ने नगर निगम से काम हासिल करने के बाद उसे आगे दूसरी एजेंसियों को सबलेट कर दिया। ऐसे मामलों में यह जांच का विषय बनता है कि मूल ठेकेदार ने किन शर्तों पर काम लिया और वास्तविक रूप से डंपिंग ग्राउंड में काम कौन कर रहा था।
*बल्क डेंसिटी के मुद्दे पर भी उठे सवाल*
डंपिंग ग्राउंड से कचरे के उठान और निपटारे में बल्क डेंसिटी की गणना को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कचरे की मात्रा और उसके आधार पर होने वाले भुगतान में अंतर होने पर नगर निगम को वित्तीय नुकसान होने की आशंका रहती है। इस पूरे रिकॉर्ड की तकनीकी और वित्तीय जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
*करीब ₹150 करोड़ खर्च होने का दावा*
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नगर निगम अब तक डंपिंग ग्राउंड से कचरा उठाने, प्रोसेसिंग और निपटारे से जुड़े विभिन्न कार्यों पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इस दौरान करीब एक दर्जन कंपनियों को विभिन्न कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की भुगतान किए जाने की बात सामने आती रही है। अब सीबीआई की कार्रवाई के बाद सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए खर्च की निगरानी कैसे हुई और ठेकों के भुगतान की प्रक्रिया में अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
*पार्षदों की राजनीति के बीच अधिकारियों की जवाबदेही का सवाल*
नगर निगम सदन में पार्षद अक्सर छोटे-बड़े राजनीतिक मुद्दों को लेकर आपस में भिड़ते दिखाई देते हैं, लेकिन डंपिंग ग्राउंड जैसे बड़े वित्तीय मामलों में अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। करोड़ों रुपये के कचरा प्रबंधन कार्यों में यदि रिश्वतखोरी के आरोप सामने आते हैं तो केवल एक कर्मचारी की गिरफ्तारी तक मामला सीमित न रहकर पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी हो जाती है। सीबीआई की मौजूदा कार्रवाई के बाद डंपिंग ग्राउंड में तैनात रहे अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों, जेसीबी संचालकों, बिलों, माप पुस्तिकाओं, भुगतान रिकॉर्ड और टेंडर प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, शक्ति शर्मा की गिरफ्तारी रिश्वत के आरोप में हुई है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

