*कांग्रेसियों में सरकार बनाने से पहले ‘खुद को बनाने’ की जंग / कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की खींचतान पर उठ रहे सवाल!*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*कांग्रेसियों में सरकार बनाने से पहले ‘खुद को बनाने’ की जंग / कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की खींचतान पर उठ रहे सवाल!*
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नई दिल्ली/चंडीगढ़ ;- कांग्रेस की राजनीति में एक सवाल लगातार चर्चा का विषय बनता जा रहा है—क्या पार्टी का प्राथमिक लक्ष्य सत्ता में वापसी है या सत्ता की दौड़ से पहले संगठन के भीतर अपने-अपने राजनीतिक भविष्य को मजबूत करना है?
पंजाब से लेकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक कांग्रेस की प्रदेश इकाइयों में नेतृत्व, संगठन और राजनीतिक वर्चस्व को लेकर मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर लंबे समय से खींचतान चली और हाल ही में हाईकमान द्वारा प्रदेश अध्यक्ष बदलने का फैसला सामने आया।
हरियाणा में भी जुलाई 2026 में वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से सामने आए मतभेदों ने प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को चर्चा में ला दिया था। मीडिया रिपोर्टों में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच राजनीतिक खींचतान का उल्लेख हुआ।
*कार्यकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल*
राजनीतिक विश्लेषण का एक प्रमुख मुद्दा यह है कि जब पार्टी के वरिष्ठ नेता संगठन को मजबूत करने के बजाय नेतृत्व और पदों को लेकर आपसी प्रतिस्पर्धा में दिखाई देते हैं, तो उसका असर जमीनी कार्यकर्ताओं और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
आलोचक इसी आधार पर सवाल उठा रहे हैं कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री, प्रदेशाध्यक्ष, विपक्ष के नेता और अन्य प्रभावशाली पदों को लेकर चलने वाली अंदरूनी राजनीति कहीं पार्टी के व्यापक चुनावी लक्ष्य पर हावी तो नहीं हो रही।
हालांकि कांग्रेस के नेता अलग-अलग मौकों पर गुटबाजी की बात से इनकार भी करते रहे हैं और संगठन की एकजुटता पर जोर देते रहे हैं लेकिन सच इसके विपरीत होता है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर जारी विवाद में भी पार्टी के भीतर से एकता के दावे सामने आए थे।
*सत्ता का रास्ता संगठन से होकर जाता है*
कांग्रेस के सामने चुनौती केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर मजबूत संगठन, स्पष्ट नेतृत्व और नेताओं के बीच समन्वय कायम करने की भी है। आने वाले चुनावों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी के अलग-अलग राजनीतिक केंद्र अपने व्यक्तिगत प्रभाव के विस्तार से आगे बढ़कर साझा चुनावी रणनीति पर कितना जोर देते हैं।
*सीधा है सवाल* कांग्रेस के नेता पहले अपना राजनीतिक कद बढ़ाने की लड़ाई लड़ेंगे या संगठन का कद बढ़ाकर सत्ता में वापसी की राह तैयार करेंगे?

