*गोदारा ने कहा सरकार की वादा खिलाफी के विरुद्ध कर्मचारी यूनियन ने लिया चरणबद्ध आंदोलन का फैसला / 5 से 11 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर विरोध, 12 अक्टूबर को हैफेड मुख्यालय पंचकूला का घेराव*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*गोदारा ने कहा सरकार की वादा खिलाफी के विरुद्ध कर्मचारी यूनियन ने लिया चरणबद्ध आंदोलन का फैसला / 5 से 11 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर विरोध, 12 अक्टूबर को हैफेड मुख्यालय पंचकूला का घेराव*
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नरवाना ;- हरियाणा कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी एम्पलाइज यूनियन की प्रदेश स्तरीय विस्तृत कार्यकारिणी बैठक आज प्रातः 11:15 बजे पुरानी अनाज मंडी, नरवाना, जिला जींद में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेशभर की विभिन्न सहकारी विपणन समितियों के कर्मचारियों ने भाग लिया। बैठक में लंबित मांगों पर विस्तृत चर्चा के बाद सरकार एवं हैफेड प्रबंधन के विरुद्ध चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
यह जानकारी देते हुए यूनियन के प्रदेश महामंत्री हनुमान गोदारा ने बताया कि हरियाणा में हैफेड के अंतर्गत मंडी स्तर पर लगभग 86 सहकारी विपणन समितियां कार्यरत हैं। इन समितियों का प्रमुख कार्य किसानों की फसलों की MSP पर खरीद व्यवस्था को संभालना तथा किसानों को उचित मूल्य पर खाद, बीज, कीटनाशक दवाइयां एवं उपभोक्ता वस्तुएं उपलब्ध करवाना है।
*धान खरीद कमीशन में कटौती से समितियों पर आर्थिक संकट*
गोदारा ने बताया कि इन कार्यों के बदले समितियों को मिलने वाले कमीशन/सर्विस चार्ज में लंबे समय से अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की गई है। यूनियन वर्ष 2011 से गेहूं खरीद पर मात्र ₹1.33 प्रति क्विंटल मिल रहे कमीशन में बढ़ोतरी की मांग करती आ रही है। उन्होंने कहा कि कमीशन बढ़ाने के बजाय पिछले वर्ष धान खरीद पर समितियों को मिलने वाले 0.25% MSP, लगभग ₹5.97 प्रति क्विंटल, के कमीशन को घटाकर ₹1.33 प्रति क्विंटल कर दिया गया। इस निर्णय के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन किया था, जिसके बाद सरकार की ओर से निर्णय पर रोक तथा समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था।
उन्होंने बताया कि यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय में मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की, लेकिन अभी तक मुख्य मांग का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। आश्वासनों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में रोष है।
*चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान*
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से निम्न कार्यक्रम तय किया गया है—
🔴 प्रथम चरण — 5 से 11 अक्टूबर 2026
प्रदेश की सभी सहकारी विपणन समितियों के कर्मचारी काली पट्टी बांधकर सरकार एवं हैफेड प्रबंधन के प्रति अपना रोष प्रकट करेंगे।
🔴 द्वितीय चरण — 12 अक्टूबर 2026
प्रदेशभर के कर्मचारी हैफेड मुख्यालय, पंचकूला का घेराव करेंगे। इसमें प्रदेश की सभी संबंधित सहकारी विपणन समितियों के कर्मचारी भाग लेंगे।
🔴 इसके बाद
यदि इसके बावजूद मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आगामी आंदोलन की घोषणा 12 अक्टूबर को ही की जाएगी।
अन्य लंबित मांगें भी उठाईं
श्री गोदारा ने बताया कि यूनियन की अन्य प्रमुख मांगों में—
1. कृषि विभाग द्वारा गेहूं बीज पर दी जाने वाली लंबित सब्सिडी की करोड़ों रुपये की राशि जारी करना।
2. आंगनबाड़ी खाद्य आपूर्ति के ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज में बढ़ोतरी।
3. खाद बिक्री मार्जिन में बढ़ोतरी।
4. वर्षों से DC रेट पर कार्यरत कर्मचारियों का समितियों के रिक्त पदों पर समायोजन/नियमितीकरण।
5. 1 जनवरी 2024 से संशोधित वेतनमान का लाभ सभी पात्र कर्मचारियों को बिना अनावश्यक शर्तों के देना।
6. सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन कर Data Entry Operator के पदों का सृजन करना आदि शामिल हैं।
*सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने की नीति पर उठाए सवाल*
गोदारा ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार का सहकारिता मंत्रालय सहकारी संस्थाओं के संवर्धन एवं सुदृढ़ीकरण तथा “सहकार से समृद्धि” के उद्देश्य से विभिन्न कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर हरियाणा में सहकारी संस्थाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण कर्मचारियों एवं समितियों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लगभग 750 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (PACS) 12000 करोड़ के ऋण असंतुलन से जूझ रही है इन समितियों से लगभग 30 लाख किसान जुड़े हुए हैं। इसी प्रकार मंडी स्तर पर कार्यरत सहकारी विपणन समितियों की आर्थिक स्थिति भी कमीशन एवं सर्विस चार्ज से जुड़े निर्णयों के कारण प्रभावित हो रही है।
*“समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन में किसानों को भी साथ लिया जाएगा”*
गोदारा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो यूनियन अपने आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए किसानों को भी साथ लेने पर विचार करेगी।
उन्होंने कहा कि आंदोलन आगे बढ़ने की स्थिति में फसल खरीद के साथ-साथ खाद, बीज एवं कीटनाशक दवाइयों की आपूर्ति जैसे सहकारी कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर उसकी जिम्मेदारी सरकार, सहकारिता विभाग एवं हैफेड प्रबंधन की होगी। उन्होंने प्रदेशभर के सभी कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन के निर्धारित कार्यक्रमों में भाग लेने का आह्वान किया।

