*IGNOU का 45 दिन में रिजल्ट का दावा फेल / परिणाम में देरी से छात्रों में बढ़ी बेचैनी / संस्थान की लोकप्रियता पर उठने लगे सवाल*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*IGNOU का 45 दिन में रिजल्ट का दावा फेल / परिणाम में देरी से छात्रों में बढ़ी बेचैनी / संस्थान की लोकप्रियता पर उठने लगे सवाल*
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चंडीगढ़ ;- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) में परीक्षा समाप्त होने के बाद परिणाम जारी होने में होने वाली देरी अब विद्यार्थियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा खत्म होने के बाद परिणाम का लंबे समय तक इंतजार करना उनके आगे की पढ़ाई, नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में प्रवेश की योजनाओं को प्रभावित करता है। विद्यार्थियों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब परीक्षा परिणाम समय पर घोषित नहीं होंगे तो छात्र अपनी अगली शैक्षणिक प्रक्रिया कैसे पूरी करेंगे। कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें परिणाम का इंतजार करते-करते बार-बार IGNOU की वेबसाइट और रिजल्ट पोर्टल देखना पड़ता है।
*45 दिनों की समयसीमा पर अमल की मांग*
छात्रों की प्रमुख मांग है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। विद्यार्थियों का कहना है कि यदि लगभग 45 दिनों के भीतर परिणाम जारी करने की व्यवस्था है, तो उसका प्रभावी ढंग से पालन होना चाहिए।
*देरी का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर*
रिजल्ट में देरी का असर केवल अंक जानने तक सीमित नहीं है। परिणाम के आधार पर विद्यार्थियों को आगे के सेमेस्टर में प्रवेश, डिग्री/प्रमाणपत्र से जुड़े कार्य, नौकरी के दस्तावेज और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में आवेदन करने होते हैं। ऐसे में परिणाम में देरी से छात्रों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
*लोकप्रियता और भरोसे पर औऱ भरोसे पर उठते सवाल*
IGNOU देश के सबसे बड़े मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा संस्थानों में शामिल है। ऐसे संस्थान में समय पर परीक्षा परिणाम जारी होना विद्यार्थियों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण है। लगातार देरी की शिकायतों से संस्थान की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों के बीच उसकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
*अब छात्रों की IGNOU प्रशासन पर नजर*
है कि परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को कितना तेज किया जाता है और भविष्य में परीक्षा से परिणाम तक की पूरी व्यवस्था को समयबद्ध बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

