*राम जन्मोत्सव पर विशेष , अयोध्या में राम जन्मोत्सव की कथा: पुत्रेष्ठि यज्ञ से हुआ मर्यादा पुरुषोत्तम का अवतरण*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
*राम जन्मोत्सव पर विशेष , अयोध्या में राम जन्मोत्सव की कथा: पुत्रेष्ठि यज्ञ से हुआ मर्यादा पुरुषोत्तम का अवतरण*
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
फरीदाबाद ;- अयोध्या प्राचीन काल में इक्ष्वाकु वंश की राजधानी रही है, जो अपनी समृद्धि, धर्म और वैभव के लिए विश्व प्रसिद्ध थी। ‘अयोध्या’ का अर्थ ही है—जिसे युद्ध में कोई जीत न सके।
*पुत्रेष्ठि यज्ञ से पूरी हुई राजा दशरथ की मनोकामना*
श्रीधाम वृंदावन के प्राचीन आश्रम चार सम्प्रदाय आश्रम श्री माध्यगौडेश्वर के महंत अनंत श्री विभूषित परम पूज्य महामंडेलश्वर सदगुरूदेव श्री ब्रज बिहारीदास शास्त्री जी ने राम जन्मोत्सव की कथा का सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि राजा दशरथ को संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी। संत-महात्माओं के मार्गदर्शन में उन्होंने पुत्रेष्ठि यज्ञ कराने का निर्णय लिया। कुलगुरु वशिष्ठ के निर्देशन में ऋष्यश्रृंग द्वारा यज्ञ संपन्न कराया गया।
यज्ञ की पूर्णाहुति के समय अग्निदेव प्रकट हुए और उन्होंने दिव्य पायस (खीर) से भरा पात्र राजा दशरथ को प्रदान किया।
*महारानियों को मिला दिव्य प्रसाद*
अग्निदेव के आदेशानुसार राजा दशरथ ने पायस को महारानी कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा में वितरित किया। मान्यता के अनुसार, इस प्रसाद के प्रभाव से चारों राजकुमारों का जन्म हुआ।
इसी दौरान एक रोचक घटना भी सामने आई, जब एक चील सुमित्रा के हाथ से पायस का भाग लेकर उड़ गई। बाद में कौशल्या ने अपने हिस्से से सुमित्रा को भाग देकर उन्हें सांत्वना दी।
*हनुमान जन्म से जुड़ी मान्यता*
कुछ धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि वह पायस अंजना को प्राप्त हुआ, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ।
*चैत्र नवमी को हुआ भगवान राम का जन्म*
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि, अभिजित मुहूर्त और पुनर्वसु नक्षत्र में राम का जन्म हुआ। इस पावन अवसर पर अयोध्या में हर्षोल्लास का वातावरण बन गया। घर-घर बधाइयां गूंजने लगीं और पूरा नगर उत्सव में डूब गया।
महामंडेलश्वर श्री ब्रज बिहारीदास कहते हैं कि जन्मोत्सव शुरू बधाई का तांता लग गया ‘अयोध्याबाजत आज बधाई। रघुकुल प्रगटे है रघुबीर देस देस ते टीको आयो , रहम कनक भनि हरि । घर घर मंगल होत बधाई, अतिपुर नाहिन भीर।। आनन्द भये सब डोलत, कछू न शोध शरीर।।
मागध वन्दी सूत लुटाये, गऊ गायन्द हथ चीर ।। देत अशीष ‘सूर’ चिरंजीको, रामचन्द रण धीर।।
राम के आदर्श आज भी प्रासंगिक
भगवान श्रीराम को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कहा जाता है। उनका जीवन सत्य, धर्म और कर्तव्य का प्रतीक है। उनके आदर्श आज भी समाज को सही मार्ग दिखाते हैं। आज भी राम नवमी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

