*कांग्रेस ने रणदीप पर जताया दोहरा भरोसा / “गुजरात में कांग्रेस का ‘ऑपरेशन रिवाइवल’ शुरू / सुरजेवाला बने मिशन के सेनापति!*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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*कांग्रेस ने रणदीप पर जताया दोहरा भरोसा / “गुजरात में कांग्रेस का ‘ऑपरेशन रिवाइवल’ शुरू / सुरजेवाला बने मिशन के सेनापति!*
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नई दिल्ली ;- कांग्रेस ने गुजरात की राजनीति में बड़ा सियासी दांव खेलते हुए वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी हाईकमान के इस फैसले ने गुजरात कांग्रेस के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है। सुरजेवाला के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के संगठन को सक्रिय करने, नेताओं को एक मंच पर लाने और कार्यकर्ताओं में नया जोश पैदा करने की होगी।
सुरजेवाला की एंट्री से गरमाई गुजरात की राजनीति
गुजरात को भाजपा का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस ने सुरजेवाला जैसे आक्रामक और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेता को जिम्मेदारी देकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी गुजरात में अपनी राजनीतिक लड़ाई को और आक्रामक बनाना चाहती है।
सुरजेवाला की राजनीतिक शैली को देखते हुए आने वाले दिनों में गुजरात में भाजपा बनाम कांग्रेस की बयानबाजी और राजनीतिक टकराव तेज होने की संभावना है।
*सबसे बड़ा सवाल: क्या कांग्रेस को मिलेगी नई धार?*
सुरजेवाला के सामने सिर्फ प्रभारी की जिम्मेदारी निभाने की चुनौती नहीं है। उन्हें गुजरात कांग्रेस के संगठन को जमीन पर मजबूत करना होगा।
मुख्य चुनौतियां—
कांग्रेस नेताओं के बीच बेहतर तालमेल,
बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना,
कार्यकर्ताओं में विश्वास और उत्साह पैदा करना,
भाजपा के मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क का मुकाबला,
युवा और नए मतदाताओं तक कांग्रेस की पहुंच बढ़ाना
पार्टी की चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाना,
*कर्नाटक के बाद गुजरात—सुरजेवाला का बढ़ा सियासी कद*
सुरजेवाला के पास कर्नाटक की जिम्मेदारी भी है। अब गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी मिलने से कांग्रेस संगठन में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे महज संगठनात्मक नियुक्ति के बजाय कांग्रेस की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
*भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की नई रणनीति?*
गुजरात में कांग्रेस के लिए मुकाबला आसान नहीं होगा। भाजपा का संगठन लंबे समय से राज्य की राजनीति में मजबूत स्थिति में है। ऐसे में सुरजेवाला को कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति से आगे निकलकर जमीनी संगठन, आक्रामक विपक्ष और चुनावी प्रबंधन—तीनों मोर्चों पर काम करना होगा।
*सुरजेवाला के सामने ‘अग्निपरीक्षा’*
सवाल सिर्फ जिम्मेदारी मिलने का नहीं, परिणाम देने का है।
क्या सुरजेवाला गुजरात कांग्रेस में नई ऊर्जा भर पाएंगे? क्या गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरियों को दूर कर पाएंगे?
क्या कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा के मुकाबले मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में लामबंद कर पाएगी?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या सुरजेवाला गुजरात में कांग्रेस की खोई राजनीतिक जमीन वापस दिलाने की दिशा में बड़ा बदलाव ला पाएंगे?
इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों की गुजरात राजनीति देगी।
राजनीतिक संदेश साफ—कांग्रेस अब गुजरात में ‘रक्षात्मक’ नहीं, ‘आक्रामक’ रणनीति चाहती है। सुरजेवाला की नई जिम्मेदारी इसी बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

