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आज होगा हरियाणा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र / पिछले 6 वर्षों में चौथी बार बुलाया विशेष सत्र*

राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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आज होगा हरियाणा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र / पिछले 6 वर्षों में चौथी बार बुलाया विशेष सत्र*
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आज होने वाले हरियाणा विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में हंगामे के आसार हैं। सुबह 11 बजे शुरू होने वाले सत्र में सबसे पहले शोक प्रस्ताव पढ़े जाएंगे। इसके तुरंत बाद सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम (लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून) को लेकर कांग्रेस की भूमिका के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएगी। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव की संभावना है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे लेकर सुबह साढ़े 9 बजे चंडीगढ़ में विधायक दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की जाएगी। इस सत्र में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण पार्टी से सस्पेंड पांच विधायक भी शामिल होंगे। इनमें नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी, सढौरा की रेनू बाला, पुन्हाना के मोहम्मद इलियास, हथीन के मोहम्मद इसराइल और रतिया के विधायक जरनैल सिंह शामिल हैं। पांचों विधायकों को सदन में पार्टी व्हिप का पालन करना होगा। यदि वे इसका पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ पार्टी कार्रवाई कर सकती है।
*हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 पेश होगा*
सदन में हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 पेश किया जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा के कॉमन कैडर के ग्रुप-डी कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए आवश्यक नियम बनाने पर सहमति बनी थी। कॉमन कैडर के वे ग्रुप-डी कर्मचारी, जिन्होंने पांच साल से अधिक सेवा पूरी कर ली है, अब क्लर्क पद पर प्रमोशन के लिए पात्र होंगे।
इस ड्राफ्ट बिल में क्लर्क पद के लिए ग्रुप-डी से प्रमोशन का कोटा 20% से बढ़ाकर 30% करने का प्रावधान है। इसके अलावा, नियमों में 5% एक्स-ग्रेशिया पद रखना भी अनिवार्य किया गया है। पिछले छह वर्षों में यह चौथा मौका है, जब प्रदेश सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। इससे पहले 13 मार्च 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास मत हासिल करने के लिए विशेष सत्र बुलाया था। उससे पहले 5 अप्रैल 2022 को चंडीगढ़ पर हरियाणा के हक को लेकर संकल्प प्रस्ताव पारित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था। वहीं, 20 जनवरी 2020 को बुलाए गए विशेष सत्र में संविधान संशोधन (126वां) बिल पारित किया गया था। इस बिल के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को 25 जनवरी 2030 तक बढ़ा दिया गया।

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