कांग्रेस ने दिया ‘कड़ा संदेश’, हरियाणा में क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर लटकी तलवार*
राणा ओबराय
राष्ट्रीय खोज/भारतीय न्यूज,
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कांग्रेस ने दिया ‘कड़ा संदेश’, हरियाणा में क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर लटकी तलवार*
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चंडीगढ़ ;- हरियाणा के राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर उठे सियासी तूफान ने अब औपचारिक रूप ले लिया है। चार
विधायकों को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस में पार्टी ने न सिर्फ गंभीर आरोप लगाए हैं, बल्कि साफ संकेत भी दे दिया है कि अनुशासन तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। नोटिस के शब्दों में ही पार्टी का तेवर झलकता है। इसमें कहा गया है कि 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान संबंधित विधायकों ने ‘पार्टी के आधिकारिक निर्देशों के विपरीत’ वोटिंग की, जिसके चलते उनके वोट को अमान्य घोषित किया गया। इसे ‘जानबूझकर किया गया कृत्य’ बताते हुए पार्टी ने इसे सीधे-सीधे एंटी-पार्टी एक्टिविटी करार दिया है।
पार्टी की अनुशासनात्मक कार्यवाही कमेटी के चेयरमैन धर्मपाल सिंह मलिक की ओर से चार विधायकों को ये नोटिस दिए हैं। मलिक कमेटी ने नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी, सढ़ौरा विधायक रेणु बाला, हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल व पुन्हाना विधायक मोहम्मद इलियास को नोटिस जारी किए हैं। गत दिवस पार्टी के हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने नई दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके इन चारों विधायकों के नाम सार्वजनिक करके आरोप लगाया था कि चारों ने क्रॉस वोटिंग की है।
नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि यह कृत्य न सिर्फ पार्टी अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि इससे पार्टी की एकता, अखंडता और वैचारिक प्रतिबद्धता को नुकसान पहुंचा है। सबसे अहम बात यह है कि पार्टी ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए चेतावनी दी है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चारों विधायकों को 7 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। नोटिस में यह भी स्पष्ट है कि यदि तय समय में जवाब नहीं मिला, तो पार्टी एकतरफा कार्रवाई करते हुए आगे बढ़ेगी।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस इस मामले में उदाहरण पेश करना चाहती है। ऐसे में संभावित कार्रवाई में पार्टी से निलंबन, संगठनात्मक पदों से हटाना या फिर सदस्यता तक खत्म करने जैसे कड़े कदम शामिल हो सकते हैं सूत्रों का मानना है कि यह सिर्फ चार विधायकों का मामला नहीं, बल्कि पूरे संगठन के लिए ‘डिसिप्लिन टेस्ट’ बन गया है।
नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी ने नोटिस पर तीखा पलटवार करते हुए खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने पूरी घटना का अलग ही पक्ष सामने रखा। शैली चौधरी के मुताबिक, ‘जब मैंने वोट डाला, तो बीजेपी एजेंट ने मेरे वोट पर आपत्ति जताई। भाजपा ने मेरे वोट को कैंसिल करने की मांग की, जिस पर 10-15 मिनट तक बहस चली। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और खेल मंत्री गौरव गौतम भी वहां मौजूद थे।’ उन्होंने दावा किया कि उन्हें 15 मिनट तक रोके रखा गया और आखिरकार उनका वोट वैध माना गया। उनका तर्क है, ‘अगर मैंने बीजेपी को वोट दिया होता, तो भाजपा मेरे वोट को रद्द करने की मांग क्यों करती और कांग्रेस के एजेंट मेरे वोट का बचाव क्यों करते।’
शैली चौधरी ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग जारी की जाए। उन्होंने कहा कि गौरव गौतम और भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछा जाए कि वहां क्या हुआ था। अगर मेरी बात गलत निकले, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगी। शैली चौधरी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने पार्टी के अंदर चल रहे गुटबाजी के खेल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में पसंद-नापसंद का खेल चल रहा है। जिन्हें नापसंद किया जाता है, उन्हें निशाना बनाया जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक बैकग्राउंड का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आती हैं और दबाव में झुकने वाली नहीं हैं। शैली चौधरी ने एक और बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार को 9 वोट कम मिले हैं, तो उन सभी 9 विधायकों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ विधायकों के वोट कैंसिल हुए, लेकिन वे पार्टी के पसंदीदा हैं, इसलिए उन्हें बचाया जा रहा है। फिलहाल गेंद चारों विधायकों के पाले में है। उनका जवाब ही तय करेगा कि मामला यहीं शांत होगा या फिर हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा सियासी विस्फोट देखने को मिलेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने हरियाणा कांग्रेस के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है। एक तरफ पार्टी अनुशासन के नाम पर सख्ती दिखा रही है, तो दूसरी तरफ विधायक खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है। यदि पार्टी कड़ी कार्रवाई करती है, तो इसका असर न सिर्फ संगठन पर बल्कि प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ेगा।
